मुजफ्फरनगर में बारिश बनी आफत! विधायक राजपाल बालियान का पैतृक गांव बना तालाब, बेडरूम तक पहुंचा पानी

मुजफ्फरनगर में बारिश बनी आफत! विधायक राजपाल बालियान का पैतृक गांव बना तालाब, बेडरूम तक पहुंचा पानी

मुजफ्फरनगर। जनपद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बुढ़ाना तहसील के गांव गढ़ी नौआबाद में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सड़कों, गलियों और घरों के साथ-साथ लोगों के बेडरूम तक बारिश का पानी पहुंच गया है। राष्ट्रीय लोकदल के वरिष्ठ विधायक राजपाल बालियान के पैतृक गांव में जलभराव ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई परिवार अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं, जबकि दर्जनों मकानों में कई फीट तक पानी भरा हुआ है।

गांव निवासी एवं भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के युवा नेता दीपांशु बालियान के घर में भी जलभराव ने भारी तबाही मचाई है। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के बाद घर के कमरों में कई फीट तक पानी भर गया है, जिससे राशन, फर्नीचर, कपड़े और अन्य घरेलू सामान पूरी तरह खराब हो चुके हैं। परिवार का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और खाने-पीने से लेकर सोने तक की व्यवस्था छत पर करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है, जो कई दिनों से बेहद कठिन परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में इस भीषण जलभराव का सबसे बड़ा कारण स्थानीय तालाब की निकासी पूरी तरह बंद होना है। लगातार हो रही बारिश का पानी बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा, जिसके कारण पूरा गांव मानो तालाब में तब्दील हो गया है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते तालाब की सफाई कर निकासी व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाती, तो आज गांव को इस गंभीर संकट का सामना नहीं करना पड़ता।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या से स्थानीय विधायक राजपाल बालियान को भी अवगत कराया था। विधायक ने जल्द समाधान का आश्वासन भी दिया, लेकिन अब तक धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी है। खबर लिखे जाने तक गांव में जल निकासी का कार्य शुरू नहीं हो सका था और दर्जनों घरों में पानी भरा हुआ था।

गांव की अधिकांश सड़कें और गलियां जलमग्न होने के कारण लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है और कई परिवार बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लंबे समय से जमा गंदा पानी अब स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो मलेरिया, डेंगू और अन्य जलजनित एवं संक्रामक बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है।

ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए गांव का स्थलीय निरीक्षण कराने, बंद पड़ी तालाब निकासी को तुरंत चालू कराने और जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए पंपिंग सेट लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र राहत कार्य शुरू नहीं किए गए तो स्थिति और अधिक गंभीर हो जाएगी तथा लोगों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।

लगातार बारिश के बीच गढ़ी नौआबाद के हालात प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बन गए हैं। अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और जिला प्रशासन कब तक मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू करता है और इस जल संकट से उन्हें निजात दिलाता है।

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