मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पुलिस के महत्वाकांक्षी ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। करीब 26 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में प्रभावी पैरवी और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास तथा दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। लंबे समय से लंबित इस मुकदमे में आए फैसले को पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के निकट पर्यवेक्षण में मुजफ्फरनगर पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग ने न्यायालय में प्रभावी ढंग से पैरवी की। इसी का परिणाम रहा कि वर्षों से लंबित मुकदमे में आरोपी को दोषसिद्ध कर सजा दिलाई जा सकी।

अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रभावी तर्कों के आधार पर चार जुलाई 2026 को एडीजे-05 एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, मुजफ्फरनगर की अदालत ने थाना तितावी में वर्ष 2000 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 160/2000, धारा 3(1) गैंगस्टर एक्ट में आरोपी प्रवीण उर्फ सिम्पल पुत्र चन्द्रपाल, निवासी ग्राम लूम, थाना छपरौली, जनपद बागपत को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
मुजफ्फरनगर पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है। गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के कारण अपराधियों को समयबद्ध तरीके से सजा दिलाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि इससे अपराधियों में कानून का भय बढ़ेगा और जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी गंभीर अपराधों से जुड़े लंबित मामलों में इसी तरह प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि पीड़ितों को न्याय मिले और अपराधियों को उनके अपराधों की उचित सजा दिलाई जा सके।

