नौकरी का झांसा, फिर कैद और अत्याचार! मुजफ्फरनगर की टॉर्चर फैक्ट्री का बड़ा राज़, गिरोह का अहम सदस्य गिरफ्तार

नौकरी का झांसा, फिर कैद और अत्याचार! मुजफ्फरनगर की टॉर्चर फैक्ट्री का बड़ा राज़, गिरोह का अहम सदस्य गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के गांव मांडी स्थित चर्चित दोना-पत्तल फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी और मजदूरों पर अमानवीय अत्याचार के मामले में पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। कई राज्यों से गरीब और मजबूर लोगों को नौकरी का सपना दिखाकर फैक्ट्री तक पहुंचाने वाले गिरोह के एक अहम सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भटक रहे मजदूरों को अच्छे वेतन, मुफ्त भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर फैक्ट्री लाता था, जहां उन्हें बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराई जाती थी। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह के नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक, क्षेत्राधिकारी फुगाना विश्वजीत सिंह तथा थाना प्रभारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में तितावी पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने ढिंढावली मार्ग स्थित पुलिया के पास से वांछित आरोपी रबित उर्फ रेबिट निवासी गांव मांडी, थाना तितावी को गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि तेईस जून को मांडी गांव स्थित दोना-पत्तल फैक्ट्री में पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान एक बाल मजदूर सहित तेरह मजदूरों को फैक्ट्री से मुक्त कराया गया था। जांच में सामने आया था कि मजदूरों को बंधक बनाकर रखा जाता था, उनसे जबरन काम कराया जाता था और विरोध करने पर मारपीट एवं मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया था। मामले में पुलिस पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी रबित उर्फ रेबिट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि फैक्ट्री संचालक और मुख्य आरोपी अंकित बालियान उसे मजदूर लाने के बदले पैसे देता था। अधिक कमाई के लालच में वह अलग-अलग राज्यों और शहरों के रेलवे स्टेशन तथा बस अड्डों पर पहुंचकर रोजगार की तलाश में घूम रहे मजदूरों को अपने जाल में फंसाता था। उन्हें बेहतर वेतन, अच्छा भोजन और रहने की सुविधा का भरोसा देकर मुजफ्फरनगर स्थित फैक्ट्री तक ले आता था।

आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि करीब दो महीने पहले वह हरिद्वार रेलवे स्टेशन से राजस्थान के एक मजदूर तथा अंबाला रेलवे स्टेशन से दो अन्य मजदूरों को बहला-फुसलाकर फैक्ट्री लेकर आया था। इन मजदूरों को भी बाद में फैक्ट्री में बंधक बनाकर जबरन काम कराया गया।

पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी भी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम तथा जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच लगातार जारी है।

मांडी की इस तथाकथित टॉर्चर फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद जनपद में बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों की सुरक्षा, श्रम कानूनों के पालन और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। प्रशासन का दावा है कि इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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