ZEE NEWS एंकर रोहित रंजन को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

टीवी न्यूज एंकर रोहित रंजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें गिरफ्तारी से छूट दे दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करने पर उन पर जयपुर, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में मामले दर्ज किए गए हैं। इन राज्यों की पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास में है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि पूरे मामले में हम नोटिस जारी कर रहे हैं। फिलहाल किसी भी राज्य की पुलिस इस मामले में गिरफ्तारी न करे।

बता दें कि, इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान को गलत संदर्भ में दिखाते हुए एक खबर प्रसारित करने के आरोप में कुछ राज्यों में प्राथमिकियों का सामना कर रहे, टीवी एंकर रोहित रंजन ने उच्चतम न्यायालय से उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई का फिर से अनुरोध किया था। जिस पर आज सुनवाई की गई। इस दौरान रोहित के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि मामले में यूपी के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी एफआईआर हो गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के जज ने किसी भी राज्य की पुलिस इस मामले में गिरफ्तारी ने करने के निर्देश दिए हैं।

रंजन ने ट्वीट किया था, ‘‘हमारे शो डीएनए में राहुल गांधी का बयान उदयपुर की घटना से जोड़कर गलत संदर्भ में चल गया था। यह एक मानवीय भूल थी, जिसके लिए हमारी टीम क्षमाप्रार्थी है। हम इसके लिए खेद जताते हैं।” याचिका में पत्रकार, उनके परिवार के सदस्यों और कार्यक्रम से जुड़े उनके सहयोगियों के लिए सुरक्षा का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है, ‘‘वर्तमान रिट याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की जा रही है जिसमें लगभग एक जैसी आपराधिक शिकायतों को रद्द करने/एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता के खिलाफ देशभर में प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। याचिकाकर्ता ने वर्तमान याचिका के लंबित रहने के दौरान दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण का अनुरोध किया है।” इसमें कहा गया है, ‘‘रंजन ने एक जुलाई, 2022 को ‘जी न्यूज’ पर एक कार्यक्रम की मेजबानी की। समाचार शो में अनजाने में कुछ उद्धरणों को गलत तरीके से पेश किया गया और त्रुटि को तुरंत ठीक कर दिया गया। याचिकाकर्ता और जी न्यूज द्वारा बिना शर्त माफी मांगी गई थी और किसी भी प्राथमिकी और शिकायत दर्ज होने से पहले ही समाचार शो को वापस ले लिया गया था।” याचिका में कहा गया है कि हालांकि, बाद में, याचिकाकर्ता के खिलाफ एक ही घटना के लिए कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत कई प्राथमिकी और शिकायतें दर्ज की गई हैं।

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