मुजफ्फरनगर। जनपद में बाल श्रम की रोकथाम को लेकर श्रम विभाग ने सोमवार को जानसठ और मीरापुर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा के आदेश तथा सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह के निर्देशन में श्रम विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और सहयोगी संस्था जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एवं ग्रामीण समाज विकास केंद्र की संयुक्त टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।

अभियान के दौरान जानसठ-मीरापुर रोड, जानसठ हाईवे बाईपास, मीरापुर कस्बा, मदान चौक, केथोड़ा और मीरापुर बस स्टैंड सहित आसपास के क्षेत्रों में होटल, ढाबे, गैरेज और अन्य प्रतिष्ठानों को चेक किया गया। टीम ने प्रतिष्ठानों पर काम करने वाले बच्चों और किशोरों की उम्र से संबंधित जानकारी भी जुटाई।


किशोर श्रमिकों को कराया बाल श्रम से मुक्त
निरीक्षण के दौरान टीम को बाल श्रम से जुड़े मामले मिले। कार्रवाई करते हुए किशोर श्रमिकों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। वहीं एक सेवायोजक के विरुद्ध निरीक्षण टिप्पणी भी दर्ज की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ शासनादेश और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाल श्रम से बाहर निकालकर शिक्षा से जोड़ना और कम उम्र में उनसे काम कराने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाना है।

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम न कराने की अपील
सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने कहा कि बच्चे का सर्वप्रथम अधिकार शिक्षा है। उन्होंने सभी सेवायोजकों और नागरिकों से अपील की कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रतिष्ठान में काम न कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को काम के बजाय शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में समाज को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
श्रम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि शासनादेश के अनुसार बाल श्रम के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। होटल, ढाबे, दुकानों, गैरेज और अन्य प्रतिष्ठानों में नियमित रूप से निरीक्षण कर बाल श्रम पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी विंध्याचल शुक्ला, थाना मानव तस्करी विरोधी इकाई प्रभारी सत्येंद्र नगर, सब इंस्पेक्टर जगत सिंह, रामावतार और प्रवीण के साथ सहयोगी संस्था जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एवं ग्रामीण समाज विकास केंद्र के गजेंद्र सिंह, राहुल सिंह और गौरव मलिक शामिल रहे।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं बाल श्रम कराया जा रहा हो तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग या हेल्पलाइन पर दें, ताकि बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण से जोड़ा जा सके।
संस्था सचिव मेहर चंद ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बच्चों के हाथों में काम नहीं, बल्कि किताबें और शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्था प्रशासन और श्रम विभाग के साथ मिलकर बाल श्रम की रोकथाम के लिए लगातार काम कर रही है। अभियान के दौरान मुक्त कराए गए किशोर श्रमिकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने होटल, ढाबा, गैरेज और अन्य प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की कि वे नाबालिग बच्चों से काम न कराएं और उनके शिक्षा के अधिकार का सम्मान करें।
इन नंबरों पर दें सूचना
बाल श्रम या बच्चों से जुड़ी किसी समस्या की सूचना के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस सहायता के लिए 112 और महिला हेल्पलाइन के लिए 1090 पर संपर्क किया जा सकता है।

