मुजफ्फरनगर। दहेज हत्या के एक बहुचर्चित मामले में करीब आठ वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषियों को कड़ी सजा दी है। थाना तितावी क्षेत्र में वर्ष 2018 में हुई विवाहिता की दहेज हत्या के मामले में न्यायालय ने पति को 14 वर्ष के कठोर कारावास तथा ससुर को 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर आठ-आठ हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले को मुजफ्फरनगर पुलिस के ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत की गई प्रभावी विवेचना और सशक्त अभियोजन का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।

यह मामला दो अप्रैल 2018 का है। मालदा बाग कॉलोनी, थाना शाहपुर निवासी सुरेश चन्द्र शर्मा ने थाना तितावी में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री को विवाह के बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप था कि मांग पूरी न होने पर पति प्रियांक और उसके पिता रमेश, निवासी ग्राम अलीपुर कला थाना तितावी ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।

पीड़ित पिता की शिकायत के आधार पर थाना तितावी पुलिस ने तत्काल भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए, 304बी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और घटना के महज दो दिन बाद चार अप्रैल 2018 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक और ठोस साक्ष्य जुटाए। जांच पूरी होने के बाद घटना के लगभग तीन महीने के भीतर ही 23 जून 2018 को दोनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। इसके बाद मामला सुनवाई के लिए अदालत में चला।
पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर संचालित ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत इस मुकदमे को प्राथमिकता में शामिल किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में एसपी ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक, एसपी अपराध इन्दु सिद्धार्थ तथा क्षेत्राधिकारी फुगाना विश्वजीत सिंह की निगरानी में थाना प्रभारी तितावी प्रमोद कुमार ने मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कराई। पुलिस ने प्रत्येक सुनवाई पर गवाहों की समय से उपस्थिति कराते हुए अभियोजन पक्ष को मजबूत बनाया, जिससे आरोपियों को राहत मिलने की कोई संभावना नहीं बची।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या आठ के न्यायाधीश काशिफ शेख के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी कुलदीप पुण्डीर और कोर्ट पैरोकार प्रमोद कुमार ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर प्रभावी पक्ष रखा। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाणों के सामने बचाव पक्ष की दलीलें टिक नहीं सकीं। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पति प्रियांक को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए 14 वर्ष के कठोर कारावास तथा ससुर रमेश को 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
पुलिस अधिकारियों ने इस फैसले को गुणवत्तापूर्ण विवेचना और मजबूत अभियोजन का परिणाम बताते हुए कहा कि जघन्य अपराधों में शामिल आरोपियों को सजा दिलाने के लिए ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय से न केवल पीड़ित परिवार को वर्षों बाद न्याय मिला है, बल्कि समाज में भी यह स्पष्ट संदेश गया है कि दहेज जैसी कुप्रथा के कारण किसी की जान लेने वालों को कानून किसी भी कीमत पर बख्शने वाला नहीं है। न्यायालय के इस फैसले के बाद लोगों ने पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की सराहना करते हुए इसे दहेज हत्या के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।

