नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के बुध विहार फेज-1 में शनिवार को सुबह एक बड़ा हादस हुआ। दिल्ली के बुध विहार फेज-1 नाले के पास बनी सड़क अचानक धंस गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस सड़क निर्माण कार्य में अनियमित्ता हुई है। घटना की जानकारी मिलेती ही दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी(डीडीएमए) और दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची। पुलिस ने सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग करते हुए ट्रैफिक की आवाजाही को रोक दिया। इस हादसे में किसी के जान माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सड़क के पास की कुछ इमारतों में दरार आ गई हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह सड़क अभी कुछ दिनों पहले ही बनकर तैयार हुई थी। इस सड़क के निर्माण के समय कई बार संबंधित विभाग को शिकायत दी गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

इस हादसे के बाद तमाम राहत बचाव दल मौके पर पहुंच कर राहत बचाव कार्य में जुट गए। साथ ही आस पास के लोगों को सुरक्षित रखने के प्राथमिकता दी गई। साथ ही तमाम जांच एजेंसियां भी इसकी जांच में जुट गई हैं। वहीं, इस मामले पर विशेषज्ञों ने एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नाले, नदियों व वॉटर बॉडीज पर कंस्ट्रक्शन के कामों को करने से पहले सभी तरह के पर्यावरणीय मानकों की और ध्यान देना चाहिए।

टॉक्सिक्स लिंक एनजीओ की चीफ प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रीति महेश ने कहा कि इस तरह के हादसे बहुत ही चिंता का विषय है। सरकार समेत सभी विभाग और एजेंसियों को नदियों, नालों के पास व किसी भी जगह पर कोई भी कंस्ट्रक्शन के काम को करने से पहले सभी पर्यावरण मानकों के तहत एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए। इस तरह की घटनाएं भविष्य के लिए बहुत गंभीर हैं। बिना पर्यावरण के मानकों की स्टडी किए मौजूदा समय में कंस्ट्रक्शन के काम किए जा रहे हैं। कंक्रीटीकरण हो रहा है, इससे नदियों, नालों के पास ऐसी कंस्ट्रक्शन के कामों की वजह से उस जगह के जमीन के अंदरूनी बुनियाद पर भी असर पड़ रहा है।