झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में सामने आए करीब 403 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड मामले ने जांच की दिशा और अंतिम लाभार्थियों को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर इस प्रकरण में हुई पूरी धनराशि के लेन-देन की जांच और इसके अंतिम लाभार्थियों की पहचान कराने की मांग की है।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक देशभर में साइबर अपराध से जुड़ी 325 शिकायतों में 56 बैंक खातों के जरिए करीब 403 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। मामले में छह आरोपितों की गिरफ्तारी और तीन आरोपितों के फरार होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि जांच में धनराशि को यूएसडीटी में बदलकर आगे भेजे जाने और संभावित विदेशी संचालकों से संबंध होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में केवल आरोपितों की गिरफ्तारी को ही कार्रवाई का अंतिम चरण नहीं माना जा सकता।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कथित 403 करोड़ रुपये में वास्तविक साइबर अपराध से अर्जित धनराशि कितनी थी, यह पैसा किन-किन खातों और माध्यमों से होकर गुजरा और अंततः किस व्यक्ति या संस्था के पास पहुंचा। उन्होंने डीजीपी से मांग की कि जांच को गिरफ्तार आरोपितों तक सीमित न रखते हुए पूरी मनी ट्रेल खंगाली जाए। बैंक खातों, यूएसडीटी और अन्य वर्चुअल करेंसी के लेन-देन की गहन जांच के साथ संभावित विदेशी संचालकों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने लाई जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि साइबर अपराध के पीड़ितों से जुड़ी धनराशि की अधिकतम संभव बरामदगी सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुलिस जांच में अब तक कितनी धनराशि चिन्हित, फ्रीज और वास्तविक रूप से बरामद की गई है, इसकी तथ्यात्मक स्थिति सार्वजनिक की जाए। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय नेटवर्क के मामले में सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि यह पता लगाना जरूरी है कि पैसे का अंतिम ठिकाना और इसके पीछे असली संचालक कौन हैं।

