चंडीगढ़। पंजाब में भगवंत मान सरकार ने राज्य की बीमार स्वास्थ्य सुविधाओं को स्वस्थ करने के लिए एक दूरगामी रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत सरकार गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से पंजाब के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बना रही है। पंजाब में सीटों की सीमित संख्या के कारण उम्मीदवारों को विशेष रूप से सरकारी कॉलेजों के लिए बड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, क्योंकि निजी संस्थान लाखों में उच्च शुल्क की मांग करते हैं। लिहाजा, सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की मांग बढ़ रही है।

टाइम्स और इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल राज्य में लगभग 3 करोड़ आबादी के लिए 12 मेडिकल कॉलेज हैं।इनमें 4 सरकारी, 6 निजी, एक पीपीपी योजना के तहत और एक केंद्र द्वारा संचालित है. इन सभी में 1,750 एमबीबीएस सीटें हैं। सरकारी में 800 और निजी कॉलेजों में 950 में उपलब्ध है। यह अखिल भारतीय स्तर की 91,000 सीटों का मात्र 2 फीसदी है, जबकि इसके अलावा 725 पीजी सीटें भी राज्य में उपलब्ध है. मेडिकल कॉलेजों के अलावा, पंजाब में 14 डेंटल कॉलेज हैं। इनमें 2 सरकारी और 12 निजी कॉलेज शामिल हैं। राज्य में 257 नर्सिंग संस्थान और 15 आयुष संस्थानों के अलावा दो सरकारी विश्वविद्यालय बीएफयूएचएस फरीदकोट, जीआरएयू होशियारपुर में हैं। वहीं दो निजी विश्वविद्यालयों में आदेश बठिंडा और एसजीआरडी अमृतसर शामिल हैं।

संगरूर कॉलेज के लिए सरकार द्वारा गुरुद्वारा मस्ताना साहिब द्वारा मुफ्त में दी गई जमीन उपलब्ध कराई गई है, जबकि मलेरकोटला मेडिकल कॉलेज के लिए पंजाब वक्फ बोर्ड द्वारा 24.44 एकड़ जमीन लीज पर दी है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान हुसैन लाल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग सामूहिक रूप से योजना तैयार करेंगे, जिसे राज्य सरकार को मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
12 कॉलेजों के अलावा तीन और कॉलेज कपूरथला, गुरदासपुर, मलेरकोटला और संगरूर में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत निर्माणाधीन हैं। केंद्र सरकार पहले ही कपूरथला और गुरदासपुर के लिए 390 करोड़ रुपये के आवंटित कोटे में से 50-50 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। योजना के तहत केंद्र सरकार कॉलेज के लिए कुल धन का 60 प्रतिशत योगदान देती है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा साझा की जाती है।
