मुजफ्फरनगर। जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने सीओ सिटी सिद्धार्थ कुमार मिश्रा को निर्देश दिए हैं कि बीएसए संदीप कुमार को गिरफ्तार कर 12 अक्टूबर 2026 को हर हाल में अदालत के समक्ष पेश किया जाए। यह कार्रवाई वर्ष 2020 में दर्ज मारपीट और हत्या के प्रयास से जुड़े एक आपराधिक मुकदमे में अदालत के आदेश के बावजूद उपस्थित नहीं होने पर की गई है।

इस मामले में बीएसए संदीप कुमार को आरोपी के रूप में नहीं, बल्कि दो आरोपियों की उम्र से संबंधित शैक्षिक अभिलेखों और गवाही के लिए अदालत में तलब किया गया था। आरोपियों के परिजनों ने दावा किया था कि घटना के समय दोनों की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इसी दावे की जांच के लिए अदालत ने संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा था। निर्धारित तारीख पर अधिकारी के उपस्थित नहीं होने के बाद अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उनकी पेशी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

समन मिलने के बाद भी अदालत में नहीं पहुंचे बीएसए
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार को 18 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से समन की तामील कराई गई थी। इसके माध्यम से उन्हें अदालत में उपस्थित होकर उम्र से संबंधित शैक्षिक अभिलेख और आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करनी थी। इसके बावजूद वह निर्धारित तारीख पर अदालत में पेश नहीं हुए।
अदालत ने इस गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया। न्यायिक कार्यवाही के दौरान संबंधित अधिकारी की उपस्थिति और अभिलेखों की आवश्यकता को देखते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। साथ ही सीओ सिटी सिद्धार्थ कुमार मिश्रा को निर्देशित किया गया कि बीएसए को गिरफ्तार कर 12 अक्टूबर 2026 को अदालत में पेश किया जाए।
अदालत के इस आदेश के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और निर्धारित तारीख पर बीएसए की पेशी महत्वपूर्ण हो गई है। न्यायालय का उद्देश्य संबंधित मुकदमे में उम्र के विवाद से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
नई मंडी थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में दर्ज हुआ था मुकदमा
पूरा मामला मुजफ्फरनगर के नई मंडी थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2020 में एक महिला ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग जबरन उसके घर में घुस आए और उसके साथ मारपीट की। महिला ने आरोपियों पर जानलेवा हमला करने और उसकी हत्या का प्रयास करने का भी आरोप लगाया था।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर नई मंडी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में मोनू, कृष्णपाल, सत्यम और बंटू समेत कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था। मुकदमे में घटना से जुड़े आरोपों और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक कार्यवाही चल रही है।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों की उम्र को लेकर विवाद सामने आने के बाद मुकदमे की कार्यवाही में एक नया पहलू जुड़ गया। आरोपियों के परिजनों ने अदालत में दावा किया कि वारदात के समय दो आरोपी नाबालिग थे। इस दावे की पुष्टि के लिए उनकी उम्र से संबंधित अभिलेखों की जांच आवश्यक हो गई।
दो आरोपियों की उम्र का विवाद बना अहम मुद्दा
आपराधिक मामलों में किसी आरोपी की घटना के समय उम्र का निर्धारण महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया जाता है, तो उसकी उम्र से संबंधित तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसके आधार पर यह तय करने में मदद मिलती है कि संबंधित व्यक्ति के मामले में किस कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
इसी कानूनी पहलू को स्पष्ट करने के लिए अदालत ने दोनों आरोपियों के शैक्षिक रिकॉर्ड और उम्र से संबंधित दस्तावेज पेश कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार को तलब किया गया था, ताकि संबंधित अभिलेखों और आवश्यक जानकारी के आधार पर अदालत मामले की आगे की कार्यवाही कर सके।
हालांकि, समन मिलने के बावजूद बीएसए के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई। अदालत ने उनकी गैरहाजिरी को ध्यान में रखते हुए अब गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अधिकारी की पेशी के बाद उम्र से संबंधित दस्तावेजों और गवाही के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया बढ़ने की उम्मीद है।
सीओ सिटी को गिरफ्तारी और पेशी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने आदेश में सीओ सिटी सिद्धार्थ कुमार मिश्रा को बीएसए संदीप कुमार की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से 12 अक्टूबर 2026 को उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश करने को कहा है।
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब संबंधित पुलिस अधिकारी को अदालत के आदेश के अनुपालन में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। निर्धारित तारीख पर बीएसए की उपस्थिति के बाद अदालत उम्र संबंधी अभिलेखों और इस मामले में आगे की सुनवाई से जुड़े आवश्यक कदम उठा सकेगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें एक सरकारी अधिकारी को उसके विभागीय पद के कारण नहीं, बल्कि न्यायालय में आवश्यक दस्तावेज और गवाही प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया था। अदालत के समक्ष उपस्थित होकर संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना इस मुकदमे की कार्यवाही के लिए जरूरी माना गया है।
न्यायिक फैसलों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं रवि कुमार दिवाकर
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर अपने न्यायिक फैसलों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर में तैनाती के बाद वह विभिन्न मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड सुनाने के फैसले दे चुके हैं। उनके पूरे न्यायिक करियर में मृत्युदंड के फैसलों की संख्या 36 बताई गई है।
अब बीएसए संदीप कुमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद यह मामला भी चर्चा में आ गया है। हालांकि, वर्तमान प्रकरण का मुख्य विषय वर्ष 2020 के आपराधिक मुकदमे में दो आरोपियों की उम्र से संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता और अदालत में तलब किए गए अधिकारी की गैरहाजिरी है।
बीएसए आरोपी नहीं, दस्तावेज और गवाही के लिए किए गए थे तलब
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बीएसए संदीप कुमार को वर्ष 2020 के मारपीट और हत्या के प्रयास के मुकदमे में आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्हें दो आरोपियों की उम्र से जुड़े शैक्षिक रिकॉर्ड और आवश्यक गवाही के लिए अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया था।
अदालत के समक्ष पेश नहीं होने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। इसे मूल आपराधिक मुकदमे में उनकी संलिप्तता या दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामला न्यायालय के आदेश के अनुपालन और आवश्यक अभिलेखों को प्रस्तुत करने से जुड़ा है।
12 अक्टूबर की पेशी पर टिकी निगाहें
अदालत ने सीओ सिटी को बीएसए संदीप कुमार को गिरफ्तार कर 12 अक्टूबर 2026 को पेश करने का निर्देश दिया है। अब इस तारीख पर होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। अधिकारी की उपस्थिति के बाद अदालत उम्र से जुड़े दस्तावेजों और आवश्यक गवाही की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगी।
वर्ष 2020 में दर्ज मारपीट और हत्या के प्रयास के इस मुकदमे में दो आरोपियों के नाबालिग होने के दावे पर न्यायालय को निर्णय के लिए संबंधित तथ्यों की जांच करनी है। ऐसे में बीएसए की पेशी और शैक्षिक अभिलेखों की उपलब्धता आगे की सुनवाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

