मुजफ्फरनगर। नगर कोतवाली क्षेत्र की किशोरी के अपहरण और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में नया मोड़ सामने आया है। मामले में साजिश रचने के आरोप में जेल भेजे गए सम्राट इंटर कॉलेज के प्रबंधक एवं संचालक इरशाद अली सम्राट को विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सशर्त जमानत दे दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष पॉक्सो एक्ट के पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार सिद्धू की अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया गया।

अदालत ने जमानत के लिए एक लाख रुपये का व्यक्तिगत बंधनपत्र और दो प्रतिभू दाखिल करने की शर्त रखी है। इसके अलावा आरोपित पर न्यायालय की अनुमति के बिना देश से बाहर जाने पर भी रोक लगाई गई है। जमानत से संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसके जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू होगी।

किशोरी के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म से जुड़ा है मामला
नगर कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ले की किशोरी के अपहरण के बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों और नेताओं की ओर से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई थी।
मामले को लेकर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, स्वामी यशवीर महाराज समेत कई लोगों की मौजूदगी में पंचायत भी हुई थी। पंचायत में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले में शामिल आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए कई आरोपितों को गिरफ्तार किया था।
एक के बाद एक हुईं गिरफ्तारियां
पुलिस की कार्रवाई के दौरान नाजिम, अल्का क्लीनिक के संचालक डॉ. आदिल और सम्राट इंटर कॉलेज के चौकीदार नदीम समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने फिरोज और उसके साथी उस्मान, निवासी मिमलाना रोड, पर 15-15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी मामले में अल्फा क्लीनिक से पोस्टर उतारने के आरोप में कामरान की गिरफ्तारी भी की गई थी। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस की ओर से मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की गई।
साजिश के आरोप में इरशाद अली सम्राट की हुई थी गिरफ्तारी
जांच के दौरान सम्राट इंटर कॉलेज के प्रबंधक एवं संचालक इरशाद अली सम्राट का नाम भी सामने आया। पुलिस ने विवेचना के आधार पर आरोप लगाया कि घटना के पीछे कथित साजिश में इरशाद अली सम्राट की भी भूमिका थी।
इसी आरोप के आधार पर पुलिस ने 28 अगस्त को इरशाद अली सम्राट को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।
मामले के दौरान मेरठ रोड स्थित सम्राट हॉस्पिटल भी चर्चा में रहा। अस्पताल के संबंध में मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से भवन निर्माण और अन्य नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई थी।
बचाव पक्ष ने की प्रभावी पैरवी
गुरुवार को इरशाद अली सम्राट की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर विशेष पॉक्सो एक्ट न्यायालय में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर दुष्यंत सिंह और अधिवक्ता योगेंद्र पंवार ने पैरवी की। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आरोपित को सशर्त जमानत देने का आदेश पारित किया।
जमानत आदेश के तहत आरोपित को एक लाख रुपये का व्यक्तिगत बंधनपत्र प्रस्तुत करना होगा तथा दो प्रतिभू दाखिल करने होंगे। इसके साथ ही न्यायालय ने बिना अनुमति देश से बाहर जाने पर रोक समेत निर्धारित शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
जमानत के बावजूद जारी रहेगी मूल मुकदमे की कार्रवाई
इरशाद अली सम्राट को जमानत मिलने के बावजूद किशोरी के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मूल मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले में पुलिस की विवेचना और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
जमानत की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आरोपित के जेल से बाहर आने की प्रक्रिया होगी। वहीं, न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना उसके लिए अनिवार्य रहेगा।

