मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद के जलकल विभाग में ट्यूबवेलों के संचालन को लेकर पुरानी और नई फर्म के बीच चल रहा विवाद अब शहर की पेयजलापूर्ति तक पहुंच गया है। स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम का सर्वर अचानक डाउन होने से ऑनलाइन संचालित होने वाले 70 ट्यूबवेल प्रभावित हो गए और शहर के कई हिस्सों में करीब 24 घंटे तक पेयजलापूर्ति बाधित रही। पानी की आपूर्ति ठप होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले को लेकर सभासदों ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से शिकायत की, जिसके बाद विभागीय जांच शुरू की गई है।

शुरुआती जांच में पुरानी फर्म पर स्काडा सिस्टम से कथित छेड़छाड़ कर सर्वर डाउन करने का प्रथम दृष्टया आरोप सामने आया है। हालांकि, विभागीय जांच अभी जारी है और अंतिम रूप से जिम्मेदारी तय होना बाकी है। कार्रवाई करते हुए नगर पालिका ने पुरानी फर्म की करीब 13 लाख रुपये की जमानत राशि वाली एफडी जब्त कर ली है। वहीं, स्काडा सिस्टम का संचालन संभाल रही नई फर्म को भी लापरवाही के आरोप में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

70 ट्यूबवेल स्काडा सिस्टम से जुड़े
जलकल विभाग के अनुसार नगर पालिका के प्रशासनिक नियंत्रण में शहर में कुल 81 ट्यूबवेल संचालित हैं। इनमें 70 ट्यूबवेल स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम से जुड़े हुए हैं। इन ट्यूबवेलों के संचालन और निगरानी की व्यवस्था ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से की जाती है।
बीते बुधवार अचानक स्काडा सिस्टम का सर्वर डाउन हो गया। सर्वर बंद होने के कारण ऑनलाइन संचालित ट्यूबवेलों का काम प्रभावित हो गया। इसका सीधा असर शहर की पेयजलापूर्ति पर पड़ा और कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति रुक गई। करीब 24 घंटे तक समस्या बने रहने से नागरिकों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ा।
सभासदों ने ईओ से की शिकायत
लंबे समय तक पानी की आपूर्ति प्रभावित रहने पर सभासदों ने मामले को गंभीरता से लिया। सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, रजत धीमान, रविकांत शर्मा और शौकत अंसारी ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
सभासदों ने शिकायत में कहा कि शहर की पेयजलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवा इतने लंबे समय तक प्रभावित रहना गंभीर मामला है। उन्होंने सर्वर डाउन होने के कारणों की जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों या एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद पालिका प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई। एई जलकल अनुज कुमार ने जेई धर्मवीर सिंह और जेई जितेन्द्र कुमार को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी।
पुरानी फर्म पर सिस्टम से छेड़छाड़ का आरोप
एई जलकल अनुज कुमार के अनुसार, शुरुआती जांच में पुरानी फर्म प्रियांग इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, गाजियाबाद की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विभाग की ओर से फर्म के मालिक अंशुल सिंह और इंद्र कुमार पर स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम में कथित रूप से छेड़छाड़ करने और सर्वर डाउन करने का प्रथम दृष्टया आरोप लगाया गया है।
इसी आधार पर नगर पालिका प्रशासन ने पुरानी फर्म की करीब 13 लाख रुपये की जमानत राशि वाली एफडी जब्त कर ली है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह शुरुआती जांच के आधार पर की गई कार्रवाई है और अंतिम जिम्मेदारी विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगी।
नई फर्म को भी नोटिस जारी
मामले में वर्तमान समय में स्काडा सिस्टम के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही सर्वेस इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ को भी जांच के दायरे में रखा गया है। जलकल विभाग ने फर्म के मालिक सर्वेस सिंह को नोटिस जारी कर सिस्टम के संचालन में कथित लापरवाही के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सर्वर डाउन होने के समय सिस्टम की तकनीकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और सिस्टम तक किस स्तर से पहुंच बनाई गई। इसके अलावा सर्वर डाउन होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करने में कितना समय लगा और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
2015 में शुरू हुई थी ऑनलाइन व्यवस्था
नगर पालिका के ट्यूबवेलों का संचालन पहले मैनुअल तरीके से किया जाता था। वर्ष 2015 से पहले ट्यूबवेलों को कर्मचारी मौके पर जाकर संचालित करते थे। इसके बाद तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल के कार्यकाल में ट्यूबवेलों के संचालन को आधुनिक बनाने के लिए स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम लागू किया गया।
टेंडर प्रक्रिया के बाद प्रियांग इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड को स्काडा सिस्टम स्थापित करने और उसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। व्यवस्था लागू होने के बाद शहर के ट्यूबवेलों का संचालन ऑनलाइन सिस्टम से होने लगा।
नए टेंडर के बाद बढ़ा विवाद
वर्ष 2025 में स्काडा सिस्टम के संचालन के लिए नया टेंडर जारी किया गया। इसमें पांच फर्मों ने भाग लिया। निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली सर्वेस इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ के पक्ष में कार्य स्वीकृत किया गया।
नई फर्म को काम मिलने के बाद वर्क ऑर्डर जारी करने को लेकर विवाद सामने आया। सर्वेस सिंह की ओर से समय पर वर्क ऑर्डर नहीं मिलने की शिकायत मंडलायुक्त से की गई थी। इसके बाद अपर नगरायुक्त राकेश यादव ने मामले की जांच कराई।
बाद में जलकल विभाग ने नई फर्म के पक्ष में वर्क ऑर्डर जारी किया और उसे एक जुलाई से कार्य शुरू करना था। हालांकि, कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू नहीं हो सकी और वर्ष 2026 में भी पुरानी फर्म करीब तीन महीने तक काम करती रही। इसी दौरान दोनों फर्मों के बीच टेंडर और कार्यभार संभालने को लेकर विवाद बना रहा।
बैकअप व्यवस्था पर भी उठे सवाल
स्काडा सिस्टम का सर्वर डाउन होने के बाद शहर के 70 ट्यूबवेलों का संचालन प्रभावित होने से नगर पालिका की वैकल्पिक व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। पेयजलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवा पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम पर निर्भर होने के कारण तकनीकी खराबी की स्थिति में मैनुअल संचालन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी समीक्षा भी जरूरी मानी जा रही है।
जांच में सर्वर की तकनीकी खराबी, कथित छेड़छाड़, सिस्टम की सुरक्षा, फर्मों की जिम्मेदारी और वैकल्पिक व्यवस्था समेत सभी पहलुओं को शामिल किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरे मामले में अंतिम जिम्मेदारी तय होगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

