मुजफ्फरनगर। विकास भवन सभागार में जन सूचना अधिकार अधिनियम की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की अध्यक्षता में हुई बैठक में आरटीआई के तहत लंबित आवेदनों, उनके निस्तारण की स्थिति और आयोग में विचाराधीन मामलों की समीक्षा की गई। राज्य सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आरटीआई आवेदनों का निर्धारित समयसीमा में पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

समय से सूचना मिलने पर आयोग तक जाने की जरूरत नहीं

बैठक में राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम का उद्देश्य आम नागरिकों को आवश्यक सूचनाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम और उसके नियमों का गंभीरता से अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवेदकों को सही, स्पष्ट और पूर्ण सूचना निर्धारित अवधि में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि यदि विभागीय स्तर पर ही आवेदकों को समय से सूचना उपलब्ध करा दी जाए तो उन्हें अनावश्यक रूप से राज्य सूचना आयोग का रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों से आरटीआई से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने को कहा।
जनपद से जुड़े 162 मामले लंबित
समीक्षा के दौरान सामने आया कि जनपद से संबंधित आरटीआई के 162 मामले वर्तमान में लंबित हैं। राज्य सूचना आयुक्त ने लंबित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर इनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीआई मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक सूचना आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध कराई जाए। साथ ही विभागीय स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा गया।
565 मामलों में लगाया जा चुका है अर्थदंड
बैठक में बताया गया कि राज्य सूचना आयोग में जनपद से संबंधित 565 मामलों में अधिकारियों पर अर्थदंड लगाया जा चुका है। इनमें से कई मामलों में अर्थदंड की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष मामलों में नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया जारी है।
राज्य सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आयोग में सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी स्वयं अथवा अधिकृत सरकारी प्रतिनिधि के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। उन्होंने कहा कि आयोग से जुड़े मामलों में अधिकारी आवश्यक अभिलेख और सूचनाएं साथ लेकर निर्धारित तिथि पर उपस्थित हों, जिससे प्रकरणों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।
दो अधिकारियों की गैरहाजिरी पर नोटिस के निर्देश
बैठक के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुपस्थित रहने का मामला भी सामने आया। इस पर मुख्य विकास अधिकारी को दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
राज्य सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को आरटीआई से संबंधित समीक्षा और आयोग की कार्यवाही को गंभीरता से लेने तथा अपने दायित्वों का समयबद्ध तरीके से निर्वहन करने के निर्देश दिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
बैठक में आरटीआई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और आम नागरिकों को निर्धारित अवधि में सूचना उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखते हुए नागरिकों की समस्याओं का विभागीय स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित करें।
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन देश दीपक सिंह, नगर मजिस्ट्रेट दीपक कुमार पाल, एडीए सचिव कुंवर बहादुर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

