मुजफ्फरनगर। फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। सोमवार को विकास भवन सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कंबाइन हार्वेस्टर स्वामियों, किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष जलाने की घटनाओं को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। किसानों को अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध तकनीक और कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाएगा।

सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना नहीं चलेंगे कंबाइन
बैठक में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कंबाइन हार्वेस्टर स्वामियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद में कोई भी कंबाइन हार्वेस्टर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना संचालित नहीं किया जाए। फसल कटाई के दौरान निर्धारित व्यवस्था का पालन करना कंबाइन मालिकों की जिम्मेदारी होगी।
प्रशासन का मानना है कि कंबाइन हार्वेस्टर में आवश्यक व्यवस्था होने से कटाई के बाद खेत में फसल अवशेषों की मात्रा कम होगी और किसानों को पराली या अन्य अवशेष जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि कंबाइन हार्वेस्टर के संचालन पर निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
पराली और गन्ने की पत्ती खेत में ही मिलाने की अपील
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को किसी भी परिस्थिति में आग न लगाएं। धान की पराली, गन्ने की पत्ती और अन्य कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से खेत में ही काटकर मिट्टी में मिलाया जाए।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से एक ओर जहां धुएं और प्रदूषण से बचाव होगा, वहीं दूसरी ओर मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे खेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में सहायता मिलेगी और किसानों को फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग का लाभ मिल सकेगा।
गांव-गांव किसानों को जागरूक करेंगे अधिकारी
बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक करें। किसानों को केवल पराली जलाने के नुकसान बताना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें अवशेषों के वैकल्पिक और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी भी दी जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को उपलब्ध कृषि यंत्रों, तकनीकों और फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए। किसानों को यह समझाया जाए कि पराली और गन्ने की पत्ती को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से खेत में ही उपयोग किया जा सकता है।
कंबाइन मालिकों की जिम्मेदारी भी तय
बैठक में कंबाइन हार्वेस्टर स्वामियों की जिम्मेदारी को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि फसल कटाई के दौरान मशीन में आवश्यक व्यवस्था मौजूद हो और सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन हो।
प्रशासन का उद्देश्य केवल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकना ही नहीं, बल्कि किसानों को ऐसी तकनीक उपलब्ध कराना भी है, जिससे फसल अवशेष उनके लिए उपयोगी साबित हो सकें। इसके लिए कृषि विभाग और संबंधित विभागों के अधिकारियों को किसानों के लगातार संपर्क में रहने तथा उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में ये अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक, कृषि विज्ञान केंद्र चित्तौड़ा के वैज्ञानिक, डीडीएम नाबार्ड सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा कंबाइन हार्वेस्टर स्वामी और किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूकता अभियान के साथ-साथ नियमों का पालन भी सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि खेतों में अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोका जा सके और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहे।

