मुजफ्फरनगर। पत्नी की हत्या के मामले में विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट ने भारतीय सेना के निलंबित सिपाही मनोज उर्फ मोनू को दोषी करार दिया है। अभियोजन के अनुसार पत्नी आकांक्षा उर्फ पूजा की हत्या के बाद घटना को पहले हृदयाघात और फिर सड़क दुर्घटना का रूप देने की कहानी सामने लाई गई थी। मंगलवार को विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डा. विजय कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने मनोज को हत्या का दोषी माना। दोषी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। न्यायालय अब आगामी 21 सितंबर को दोषी की सजा के बिंदु पर निर्णय सुनाएगा।

मनोज वर्ष 2024 से जिला कारागार में निरुद्ध है। मुकदमा दर्ज होने और गिरफ्तारी के बाद उसे भारतीय सेना से निलंबित कर दिया गया था। मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका को लेकर भी मुकदमा दर्ज किया गया था।

2017 में हुई थी शादी
अभियोजन पक्ष के अनुसार मेरठ जिले के मवाना क्षेत्र के गांव मीवा निवासी सुभाष ने अपनी बेटी आकांक्षा उर्फ पूजा की शादी छह फरवरी 2017 को कासमपुर खोला निवासी मनोज उर्फ मोनू के साथ की थी। मनोज भारतीय सेना में सिपाही के पद पर तैनात था। उसके पिता का नाम अजब सिंह बताया गया है।
मायके पक्ष ने शादी के बाद से ही आकांक्षा को दहेज की मांग को लेकर परेशान किए जाने के आरोप लगाए थे। परिजनों का आरोप था कि ससुराल पक्ष की ओर से विवाहिता का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था।
छुट्टी बढ़ाकर पत्नी को मायके लेकर पहुंचा था
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार के अनुसार मार्च 2024 में मनोज छुट्टी पर घर आया था और अप्रैल में उसे ड्यूटी पर वापस लौटना था। अभियोजन के मुताबिक मनोज ने पत्नी की तबीयत खराब होने का हवाला देकर अपनी छुट्टी बढ़वा ली थी।
इसके बाद दो अप्रैल 2024 को वह पत्नी आकांक्षा को लेकर उसके मायके गांव मीवा पहुंचा। अगले दिन तीन अप्रैल को मनोज पत्नी को साथ लेकर मीवा से कासमपुर खोला के लिए रवाना हुआ।
पहले हृदयाघात, फिर हादसे की दी गई सूचना
अभियोजन के अनुसार तीन अप्रैल की शाम करीब साढ़े सात बजे मनोज के पिता अजब सिंह ने आकांक्षा के पिता सुभाष को फोन कर बताया कि उनकी बेटी को हृदयाघात हुआ है और मनोज उसे चिकित्सक के पास लेकर जा रहा है। कुछ देर बाद परिवार को सूचना दी गई कि रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और हादसे में आकांक्षा की मौत हो गई।
अचानक बेटी की मौत की सूचना मिलने के बाद मायके पक्ष को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। परिजनों ने आरोप लगाया कि आकांक्षा की हत्या के बाद घटना को पहले हृदयाघात और बाद में सड़क हादसे का रूप देने का प्रयास किया गया।
मीरापुर थाने में दर्ज कराया गया था मुकदमा
आकांक्षा के पिता सुभाष ने मीरापुर थाने में तहरीर देकर मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मनोज उर्फ मोनू, उसके पिता अजब सिंह, सास मिथलेश, चाचा मंगलू और बहनोई लवकुश के खिलाफ दहेज हत्या समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद मुख्य आरोपित मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद से वह जिला कारागार में निरुद्ध है। मुकदमा दर्ज होने के बाद भारतीय सेना में सिपाही के पद पर कार्यरत मनोज को निलंबित कर दिया गया था।
अदालत में अभियोजन ने रखे साक्ष्य
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डा. विजय कुमार की अदालत में हुई। मंगलवार को मनोज को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार ने मामले से संबंधित साक्ष्य और अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा।
तमाम पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने मनोज उर्फ मोनू को उसकी पत्नी आकांक्षा उर्फ पूजा की हत्या का दोषी करार दिया। अब न्यायालय आगामी 21 सितंबर को दोषी की सजा के संबंध में अपना निर्णय सुनाएगा।

