मुजफ्फरनगर में गुरु रविदास मंदिर और बारातघर की जमीन पर कब्जे का आरोप, जय समता पार्टी का प्रदर्शन; डीएम को सौंपा ज्ञापन

मुजफ्फरनगर में गुरु रविदास मंदिर और बारातघर की जमीन पर कब्जे का आरोप, जय समता पार्टी का प्रदर्शन; डीएम को सौंपा ज्ञापन

मुजफ्फरनगर। विकास खंड मोरना के ग्राम बेहड़ा सादात में गुरु रविदास मंदिर एवं बारातघर की भूमि पर कथित अवैध कब्जे के आरोप को लेकर सोमवार को जय समता पार्टी के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ग्राम प्रधान और पंचायत अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि दलित बस्ती में स्थित गुरु रविदास मंदिर एवं बारातघर की भूमि वर्ष 1980 से सार्वजनिक और सामाजिक उपयोग में रही है। इस स्थान पर वर्षों से धार्मिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित होती रही हैं। आरोप है कि हाल के दिनों में इस भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव तथा संबंधित पंचायत अधिकारियों ने बिना किसी वैध प्रशासनिक आदेश, ग्राम सभा की स्वीकृति या स्थानीय लोगों की सहमति के पंचायत सचिवालय का निर्माण कार्य शुरू करा दिया। उनका कहना है कि निर्माण कार्य से गुरु रविदास मंदिर और बारातघर की भूमि प्रभावित हो रही है तथा इससे सार्वजनिक उपयोग की इस भूमि का स्वरूप बदलने की आशंका है।

जय समता पार्टी के नेताओं ने इसे दलित समाज के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि यदि इस भूमि पर निर्माण जारी रहा तो समाज की पारंपरिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य की जांच कराने और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

प्रदर्शन के बाद पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि यदि जांच में अवैध कब्जा, नियमों का उल्लंघन या अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो ग्राम प्रधान एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सार्वजनिक और धार्मिक महत्व की भूमि को किसी भी प्रकार के अतिक्रमण का शिकार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि मामले में पारदर्शी निर्णय से ही लोगों का विश्वास बना रहेगा।

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