मुजफ्फरनगर। गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपियों को अदालत से सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस को एक और सफलता मिली है। गैंगस्टर एक्ट के मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

सिविल लाइन थाने में दर्ज था गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा
मामला थाना सिविल लाइन क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 275/2022 दर्ज किया गया था। यह मुकदमा भारतीय न्याय व्यवस्था के तहत गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) में दर्ज किया गया था।

मुकदमा दर्ज होने के बाद इसकी विवेचना और न्यायालय में प्रभावी पैरवी पर पुलिस की मॉनिटरिंग सेल तथा अभियोजन पक्ष की ओर से लगातार नजर रखी गई। पुलिस का दावा है कि सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किए गए।
अदालत ने 12 अगस्त को सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद एडीजे पांच तथा विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, मुजफ्फरनगर की अदालत ने 12 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
दोषी ठहराया गया आरोपी नवेद पुत्र मनसाद उर्फ भूरा उर्फ मंशाद कुरैशी है। वह थाना सिविल लाइन क्षेत्र के महमूदनगर की गली नंबर छह का निवासी बताया गया है।
अदालत ने नवेद को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाने के साथ उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
मजबूत पैरवी से मिली सजा
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत की गई। अभियान का उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी कर आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलाना है।
इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में पैरवी की गई। पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष ने मामले की लगातार निगरानी की।
लंबित मामलों की लगातार हो रही समीक्षा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार किसी आपराधिक मामले में मुकदमा दर्ज करना ही पुलिस की जिम्मेदारी का अंतिम चरण नहीं है। दोषियों को अदालत से सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों को सही तरीके से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना भी पुलिस की प्राथमिकता है।
इसी उद्देश्य से जिले में लंबित आपराधिक मामलों की समीक्षा की जा रही है। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मामलों की पैरवी को मजबूत किया जा रहा है, ताकि गंभीर अपराधों में दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कानून के मुताबिक सजा मिल सके।

