मुजफ्फरनगर में अस्पताल के खातों में करीब 1 करोड़ का खेल! पूर्व अकाउंटेंट गिरफ्तार, आयुष्मान भुगतान में हेरफेर का आरोप

मुजफ्फरनगर में अस्पताल के खातों में करीब 1 करोड़ का खेल! पूर्व अकाउंटेंट गिरफ्तार, आयुष्मान भुगतान में हेरफेर का आरोप

मुजफ्फरनगर। भोपा रोड स्थित इवान मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी और गबन का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर नई मंडी थाना पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले में पुलिस ने अस्पताल के पूर्व अकाउंट एग्जीक्यूटिव अक्षय बंसल को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे जेल भेज दिया। वहीं, मुकदमे में नामजद चार अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है।

सीईओ की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस के अनुसार इवान मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय कुमार जैन ने 25 जून को नई मंडी थाने में शिकायत देकर वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक अक्षय बंसल पुत्र मनोज बंसल पिछले करीब दो वर्षों से अस्पताल के लेखा विभाग में अकाउंट एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत था। अस्पताल में रहते हुए उसके पास दैनिक वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम थे। वह रिसेप्शन से प्राप्त होने वाली रकम, कैंटीन के लेनदेन और टीपीए यानी थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर से जुड़े वित्तीय खातों का काम देखता था।

दो लाख रुपये के हिसाब से खुला गड़बड़ी का राज

अस्पताल में वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा करीब चार महीने पहले हुआ। अस्पताल की स्वामी मंजू जैन ने लेखा-जोखे की आंतरिक जांच शुरू कराई थी। जांच के शुरुआती दौर में ही करीब दो लाख रुपये की रकम का हिसाब नहीं मिला।

रकम में गड़बड़ी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्कालीन अकाउंट एग्जीक्यूटिव अक्षय बंसल से पूछताछ की और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू कराई। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि मामला केवल दो लाख रुपये तक सीमित नहीं था, बल्कि अस्पताल के वित्तीय खातों में बड़े स्तर पर हेराफेरी की गई थी।

जांच आगे बढ़ने पर आयुष्मान भारत योजना से जुड़े भुगतान में भी कथित अनियमितता सामने आई। अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि योजना के तहत अस्पताल को प्राप्त होने वाली रकम को रिकॉर्ड में शून्य दर्शाया गया और इस रकम का हिसाब भी वित्तीय अभिलेखों में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।

आयुष्मान भारत योजना के भुगतान में भी हेराफेरी का आरोप

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल को प्राप्त होने वाले भुगतान में भी हेराफेरी की। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, योजना से प्राप्त रकम को रिकॉर्ड में शून्य दिखाकर वित्तीय गड़बड़ी की गई।

पुलिस और अस्पताल प्रबंधन की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कथित गबन की रकम बढ़ती चली गई। जांच में करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन की बात सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस अब बैंक खातों, अस्पताल के वित्तीय दस्तावेजों और आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

परिजनों और पूर्व कर्मचारियों पर भी आरोप

अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा अकेले नहीं किया गया, बल्कि इसमें आरोपी के परिजनों और अस्पताल के पूर्व कर्मचारियों की भी भूमिका रही। पुलिस ने अस्पताल की शिकायत के आधार पर पांच लोगों को नामजद किया है।

मामले में पूर्व अकाउंट एग्जीक्यूटिव अक्षय बंसल के अलावा उसके पिता मनोज बंसल, माता श्मती बंसल, अस्पताल की पूर्व कर्मचारी तृप्ति गुप्ता और पूर्व लेखाकार अमित गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है।

पूर्व अकाउंट एग्जीक्यूटिव गिरफ्तार

नई मंडी थाना प्रभारी आनंददेव मिश्रा ने बताया कि करीब एक करोड़ रुपये के गबन के मामले में वांछित चल रहे आरोपी अक्षय बंसल पुत्र मनोज बंसल को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की और इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

थाना प्रभारी के अनुसार, मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। पुलिस अस्पताल के बैंक खातों, आयुष्मान भारत योजना से संबंधित रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य लेनदेन की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य कथित रूप से गबन की गई रकम के लेनदेन और उसके इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों का पता लगाना है।

चार आरोपी अभी फरार

पुलिस के मुताबिक मामले में नामजद अन्य चार आरोपी फिलहाल फरार हैं। इनमें अक्षय बंसल के पिता मनोज बंसल, माता श्मती बंसल, पूर्व कर्मचारी तृप्ति गुप्ता और पूर्व लेखाकार अमित गुप्ता शामिल हैं। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अस्पताल में करीब एक करोड़ रुपये के कथित वित्तीय गबन के मामले ने स्वास्थ्य संस्थानों में वित्तीय निगरानी और आयुष्मान योजना से जुड़े भुगतान के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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