मुजफ्फरनगर। देशभर में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों पर व्हाट्सएप खाते सक्रिय कराने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का मुजफ्फरनगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना साइबर क्राइम पुलिस ने गांव हरसौली निवासी दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों युवक भोले-भाले लोगों को निजी जरूरत का हवाला देकर उनके नाम पर सिम कार्ड निकलवाते थे और फिर इन सिम कार्डों को सक्रिय कर उन पर आने वाले व्हाट्सएप ओटीपी विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को भेज देते थे। इन ओटीपी के जरिए विदेशी साइबर ठग भारतीय मोबाइल नंबरों पर व्हाट्सएप खाते संचालित करते थे और देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों को अपना निशाना बनाते थे।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोनू पुत्र मेहर इलाही और कबीर पुत्र मुकीम निवासी गांव हरसौली के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में इनके तार थाईलैंड समेत अन्य देशों में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी तकनीकी जांच में करीब 70 सिम कार्ड सक्रिय होने की जानकारी मिली है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कितने व्हाट्सएप खातों को संचालित करने और साइबर ठगी की वारदातों में किया गया।

प्रतिबिंब पोर्टल पर शिकायतों से खुला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
थाना साइबर क्राइम प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के मुताबिक, गृह मंत्रालय भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल प्रतिबिंब पर मुजफ्फरनगर से फर्जी व्हाट्सएप कॉल और संदेश भेजकर साइबर धोखाधड़ी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ मोबाइल नंबर मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र में सक्रिय किए गए थे। इन नंबरों पर व्हाट्सएप खाते बनाने के लिए आने वाले ओटीपी विदेश में बैठे लोगों को भेजे जा रहे थे। पुलिस ने संबंधित मोबाइल नंबरों और शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया तो स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका सामने आई।
इसके बाद पुलिस टीम ने जांच आगे बढ़ाते हुए गांव हरसौली में दबिश दी और मोनू तथा कबीर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों की ओर से सिम कार्ड उपलब्ध कराने और ओटीपी विदेश भेजने से संबंधित गतिविधियों की जानकारी सामने आई।
परिचितों को निजी जरूरत बताकर निकलवाते थे सिम कार्ड
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपने परिचितों और अन्य लोगों को निजी जरूरत बताकर उनके नाम पर नए सिम कार्ड निकलवाते थे। लोगों को बताया जाता था कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए किया जाएगा। विश्वास में लेकर सिम कार्ड प्राप्त करने के बाद आरोपी उन्हें सक्रिय कराते थे।
इसके बाद संबंधित मोबाइल नंबरों पर व्हाट्सएप अकाउंट बनाने के लिए आने वाले ओटीपी विदेश में बैठे अपने साथियों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेज दिए जाते थे। इन ओटीपी की मदद से विदेशी साइबर अपराधी भारतीय मोबाइल नंबरों पर व्हाट्सएप लॉगिन कर लेते थे।
भारतीय नंबरों पर संचालित इन व्हाट्सएप खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से संपर्क करने और साइबर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम देने में किया जाता था। इस तरह स्थानीय स्तर पर सिम उपलब्ध कराने वाले आरोपी और विदेश में बैठे साइबर अपराधी एक-दूसरे के संपर्क में रहकर पूरा नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
झारखंड और पश्चिम बंगाल में 53.83 लाख की ठगी
पुलिस की जांच में अब तक इस नेटवर्क के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी के दो मामले सामने आए हैं। इनमें एक शिकायत झारखंड और दूसरी पश्चिम बंगाल राज्य से संबंधित है। दोनों मामलों में कुल 53 लाख 83 हजार 822 रुपये की साइबर ठगी किए जाने की जानकारी मिली है।
पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और उनमें सक्रिय सिम कार्डों की विस्तृत तकनीकी जांच से इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल पुलिस संबंधित मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप खातों और उनसे जुड़ी शिकायतों की जानकारी जुटा रही है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने लोगों के नाम पर सिम कार्ड निकलवाए गए और उनमें से कितने नंबरों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने किया।
दो मोबाइलों में करीब 70 सिम कार्ड सक्रिय मिलने से पुलिस भी हैरान
गिरफ्तार आरोपियों से बरामद दोनों मोबाइल फोन की तकनीकी जांच में करीब 70 सिम कार्ड सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में सिम कार्डों का सक्रिय होना पुलिस जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्डों में से कितने नंबरों पर व्हाट्सएप खाते बनाए गए और कितने नंबर विदेशी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जिनके नाम पर ये सिम कार्ड जारी हुए थे।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित लोगों को उनके नाम पर जारी सिम कार्डों के वास्तविक इस्तेमाल की जानकारी थी या नहीं। विदेश में बैठे साइबर अपराधियों और स्थानीय आरोपियों के बीच संपर्क के माध्यम तथा नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज
इस मामले में थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर में मुकदमा अपराध संख्या 39/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) और 111 के तहत अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आवश्यक विधिक प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार विदेश में बैठे साइबर अपराधियों से भी जुड़े होने की आशंका है। इसी वजह से पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि ठगी में इस्तेमाल किए गए अन्य मोबाइल नंबरों और इसमें शामिल लोगों का पता लगाया जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले में कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय के पर्यवेक्षण में की गई।
कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ और क्षेत्राधिकारी अपराध सुभाषचंद के नेतृत्व में साइबर क्राइम प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, उपनिरीक्षक जय शर्मा, उपनिरीक्षक मुबारिक हसन, हेड कांस्टेबल बालकिशन, हेड कांस्टेबल आकाश चौधरी और हेड कांस्टेबल सुनील कुमार शामिल रहे।
70 सिम कार्डों की जांच से खुल सकते हैं कई और राज
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। करीब 70 सक्रिय सिम कार्डों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनका इस्तेमाल किन-किन राज्यों में साइबर ठगी के लिए किया गया। झारखंड और पश्चिम बंगाल के दो मामलों में सामने आई 53.83 लाख रुपये की ठगी के अलावा अन्य पीड़ितों की तलाश भी की जा रही है।
पुलिस को आशंका है कि मोबाइल फोन में मिले सिम कार्डों और उनसे जुड़े व्हाट्सएप खातों की जांच से साइबर अपराध के अन्य मामलों का भी पता चल सकता है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

