मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 के सांप्रदायिक दंगों की बरसी के बीच मुजफ्फरनगर शहर में सोमवार को लगाए गए विवादित होर्डिंग्स को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। शहर के प्रमुख और व्यस्त प्रकाश चौक से रोडवेज बस अड्डे के बीच अचानक लगाए गए तीन बड़े होर्डिंग्स में वर्ष 2013 की घटनाओं से जुड़ी अखबारी खबरों की कटिंग और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। होर्डिंग्स पर “ना भूले हैं, ना भूलेंगे” और “न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे…” जैसे संदेश लिखे गए थे।

होर्डिंग्स के सामने आने के बाद शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। राहगीर और स्थानीय लोग रुककर पोस्टरों को देखने लगे। मामला संवेदनशील होने के कारण इसकी सूचना पुलिस-प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी विवादित होर्डिंग्स को हटवा दिया।

इन होर्डिंग्स में वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित उस समय प्रकाशित विभिन्न समाचार पत्रों की खबरों और तस्वीरों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था। इसके अलावा एक होर्डिंग में अखिलेश यादव की तस्वीर का ऐसा प्रस्तुतिकरण किया गया था, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। तस्वीर में अखिलेश यादव को सोफे पर बैठे दिखाया गया था, जबकि उनके सामने महिला कलाकारों को नृत्य करते हुए प्रदर्शित किया गया था।
दंगों की बरसी और 7 सितंबर की संवेदनशील तारीख के बीच इस तरह के होर्डिंग्स का सार्वजनिक स्थान पर सामने आना राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाने लगा। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन होर्डिंग्स को किस व्यक्ति, संगठन या समूह ने लगवाया था।
पुलिस ने तुरंत हटवाए होर्डिंग्स, जांच शुरू
विवादित होर्डिंग्स की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन सक्रिय हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तीनों होर्डिंग्स को हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से होर्डिंग्स आपत्तिजनक पाए गए थे।
एएसपी एवं क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ के. मिश्रा के अनुसार, होर्डिंग्स किसके द्वारा लगाए गए और इन्हें लगाने के पीछे किन लोगों की भूमिका है, इसकी जांच की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
होर्डिंग्स हटाए जाने के बाद भी यह सवाल शहर में चर्चा का विषय बना रहा कि आखिर इतने संवेदनशील अवसर पर इन्हें किसने लगवाया और इन्हें लगाने का उद्देश्य क्या था। पुलिस अब इस दिशा में भी जानकारी जुटा रही है कि होर्डिंग लगाने के लिए किसी स्तर पर अनुमति ली गई थी या नहीं।
अखिलेश यादव की तस्वीर को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
तीनों होर्डिंग्स में सबसे ज्यादा चर्चा उस पोस्टर को लेकर रही, जिसमें अखिलेश यादव की तस्वीर लगाई गई थी। तस्वीर के साथ वर्ष 2013 के दंगों से संबंधित अखबारी खबरों की कटिंग और तीखे संदेश प्रदर्शित किए गए थे।
प्रकाश चौक और रोडवेज बस अड्डे के बीच शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर लगे होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की नजर इन होर्डिंग्स पर पड़ी। कई राहगीर रुककर उन्हें देखने लगे और कुछ लोगों ने मोबाइल फोन से तस्वीरें भी खींचीं। देखते ही देखते होर्डिंग्स की चर्चा शहर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2013 के दंगे आज भी मुजफ्फरनगर के लिए बेहद संवेदनशील अध्याय हैं। ऐसे में दंगों से जुड़ी पुरानी तस्वीरों और अखबारी खबरों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने से पुराने जख्म फिर चर्चा में आ गए।
2013 की हिंसा की बरसी पर फिर गरमाया मुजफ्फरनगर
वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में हुई सांप्रदायिक हिंसा का असर लंबे समय तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल पर रहा। 7 सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ में आयोजित महापंचायत के बाद क्षेत्र में हिंसा भड़कने की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान मुजफ्फरनगर की ओर खींचा था।
उस दौर की हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और हजारों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मुजफ्फरनगर दंगे देश की राजनीति में एक प्रमुख मुद्दा बन गए थे।
इसी संवेदनशील इतिहास की बरसी के मौके पर शहर में लगाए गए होर्डिंग्स ने एक बार फिर वर्ष 2013 की घटनाओं को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। होर्डिंग्स पर लिखे संदेश और अखिलेश यादव की तस्वीर को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
किसने लगवाए होर्डिंग, इसका जवाब तलाश रही पुलिस
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहर के मुख्य मार्ग पर ये तीनों होर्डिंग किसने लगवाए। अभी तक किसी व्यक्ति, संगठन अथवा राजनीतिक दल ने आधिकारिक रूप से इन होर्डिंग्स की जिम्मेदारी नहीं ली है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। होर्डिंग्स लगाने वालों की पहचान और उनकी मंशा का पता लगाने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांच के बाद यदि किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दंगों की बरसी, विवादित संदेश, अखिलेश यादव की तस्वीर और पुलिस द्वारा होर्डिंग्स हटाए जाने के बाद मुजफ्फरनगर में यह मामला फिलहाल राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना हुआ है।

