मुजफ्फरनगर। चरथावल विकासखंड क्षेत्र के गांव अकबरगढ़ में सरकारी भवनों से गेट और खिड़कियां गायब मिलने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। सरकारी स्कूल समेत गांव में स्थित कई सरकारी भवनों से कथित रूप से गेट और खिड़कियां उखाड़े जाने की जानकारी सामने आने पर ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या हटाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भवनों में लगी संपत्ति को रात के अंधेरे में निकलवाया गया। उनका दावा है कि स्कूल समेत अन्य सरकारी भवनों से गेट और विंडो हटाए जाने के बाद इस सामान को चोरी-छिपे आसपास के लोगों को बेच दिया गया। इस मामले में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कई सरकारी भवनों से गायब मिले गेट और खिड़कियां
ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने गांव में स्थित सरकारी भवनों का निरीक्षण किया तो कई स्थानों पर गेट और खिड़कियां गायब मिलीं। सरकारी भवनों से इस तरह सामान हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर इन भवनों से सरकारी संपत्ति हटाने की अनुमति किसने दी और किस प्रक्रिया के तहत यह काम कराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी भवनों में लगी संपत्ति खराब या अनुपयोगी थी तो उसे हटाने के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। बिना किसी स्पष्ट जानकारी के गेट और खिड़कियां गायब मिलने से ग्रामीणों के बीच तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं।
ग्राम प्रधान पर लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी भवनों से सामान निकलवाने के बाद उसे आसपास के घरों में बेचे जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने इस मामले में दस्तावेजों और मौके पर मौजूद सरकारी संपत्ति का मिलान कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों का कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने अथवा नियमों के विपरीत उसे हटाने में शामिल सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
धरने पर बैठे ग्रामीण, प्रशासन से जांच की मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर धरना शुरू कर दिया है। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव के सभी सरकारी भवनों का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही सरकारी भवनों में मौजूद और गायब हुई संपत्ति का भौतिक सत्यापन कराने की मांग भी उठाई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूल और अन्य भवनों की स्थिति की जांच कर यह पता लगाया जाए कि वहां पहले कितने गेट और खिड़कियां लगी थीं और वर्तमान में कितनी मौजूद हैं। इसके अलावा उन्हें हटाने या बदलने से संबंधित कोई अनुमति, आदेश या सरकारी रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
जांच के बाद साफ होगी पूरे मामले की तस्वीर
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी संपत्ति के संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में नियमों के विपरीत सरकारी सामान हटाए जाने या उसकी बिक्री किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों के बीच प्रशासनिक जांच की मांग तेज हो गई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी भवनों से गेट और खिड़कियां किसके आदेश पर हटाई गईं, उन्हें कहां ले जाया गया और इस पूरी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं। ग्रामीणों ने जल्द जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

