मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। मीरापुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गोवंश पर लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप तेजी से बढ़ता बताया जा रहा है। क्षेत्र में सैकड़ों गोवंश के संक्रमित होने और दर्जनों पशुओं की मौत की खबर से किसानों और पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है। बीमारी के फैलाव को देखते हुए पशुपालन विभाग ने निगरानी और उपचार के लिए विशेष टीमों को सक्रिय किया है।

उत्तराखंड सीमा से संक्रमण फैलने की जानकारी
मीरापुर पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. अजय कुमार के अनुसार, संक्रमण पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों से फैलते हुए मीरापुर क्षेत्र तक पहुंचा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई पशुपालकों के गोवंश में बीमारी के लक्षण सामने आए हैं।

हालांकि, मीरापुर स्थित कान्हा गौशाला में अभी किसी गोवंश के संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। गौशाला में संक्रमण को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
शरीर पर गांठें और सूजन प्रमुख लक्षण
पशु चिकित्सकों के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गोवंश को प्रभावित करती है। संक्रमित पशुओं की त्वचा पर गांठें और उभार दिखाई देने लगते हैं। इसके साथ शरीर में सूजन, तेज बुखार, कमजोरी और दाना-पानी छोड़ने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
बीमारी बढ़ने पर पशु बेहद कमजोर हो जाते हैं और गंभीर स्थिति में उनकी मौत भी हो सकती है। संक्रमण को देखते हुए पशुपालकों से शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की गई है।
करीब एक दर्जन चिकित्सकों की टीम सक्रिय
बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग ने करीब एक दर्जन पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की है। किसी गांव से पशु के बीमार होने की सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर जांच और उपचार कर रही है।
संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों के आसपास स्वस्थ गोवंश का टीकाकरण भी कराया जा रहा है। विभाग की ओर से गांवों में निगरानी बढ़ाने के साथ पशुपालकों को बीमारी के लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बीमार पशु को तुरंत अलग करने की अपील
पशु चिकित्सा विभाग ने किसानों और पशुपालकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग के मुताबिक, किसी पशु की त्वचा पर असामान्य गांठें, सूजन, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए।
इसके साथ ही नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक को इसकी सूचना देने की सलाह दी गई है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन और पशुपालन विभाग की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर है।

