मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। कस्बे में बंदरों का बढ़ता आतंक लगातार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। गुरुवार को मोहल्ला कायस्थ में बंदरों के डर से भाग रहे छह वर्षीय मासूम के साथ दर्दनाक हादसा हो गया। छत पर खेल रहा बच्चा बंदरों के झुंड से बचने के प्रयास में नीचे गिर गया और पड़ोसी की छत पर रखे लोहे के सरिये से गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और नगर पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

जानकारी के अनुसार मोहल्ला कायस्थ निवासी आसिफ का छह वर्षीय पुत्र अरकम अपने घर की छत पर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक बंदरों का एक झुंड छत पर पहुंच गया। बंदरों को अपनी ओर बढ़ता देख मासूम घबरा गया और जान बचाने के लिए भागने लगा। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पड़ोसी की छत पर जा गिरा।

बताया गया कि पड़ोसी की छत पर निर्माण कार्य के लिए लोहे के सरिये रखे हुए थे। गिरते ही एक सरिया बच्चे के पेट में घुस गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं तड़पने लगा। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और परिजनों को सूचना दी। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने देर रात आपातकालीन ऑपरेशन कर सरिये को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया।
वार्ड सभासद राशिद ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने समय रहते ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचा ली। फिलहाल अरकम की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नगर पंचायत प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि कस्बे में लंबे समय से बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। कई बार शिकायत करने और कार्रवाई की मांग उठाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिसका खामियाजा आम लोगों, खासकर बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
नगर पंचायत अध्यक्ष जमील अहमद ने बताया कि बंदरों और आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। टेंडर प्रक्रिया और अन्य कानूनी औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने और लोगों को राहत दिलाने का कार्य शुरू किया जाएगा।
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों के बढ़ते आतंक पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति न हो और लोगों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

