कैराना। सीएमओ को दिए गए पत्र में कोतवाली क्षेत्र के गांव अलीपुर निवासी पीड़ित दिलशाद ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन के नाम पर ४० हजार रुपये भी जमा करा लिए और मेरी पत्नी का गलत ऑपरेशन कर दिया। वहीं पीड़ित ने कहा कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के बाद टाके भी नही लगाए और उसकी पत्नी को रेफर कर दिया। पीड़ित दिलशाद ने कहा कि उसकी पत्नी की डिलीवरी होनी थी डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए कहा डॉक्टर ने उसकी पत्नी का ऑपरेशन किया। लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसके नवजात शिशु की मौत गई। बल्कि डॉक्टर ने मरीज के शरीर के अंदर की कोई नस काट दी जिसके चलते मेरे मरीज की हालत खराब हो गई।
कस्बे के शामली रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टर पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए सीएमओ को प्रार्थना पत्र दिया है। यह मामला कस्बे शामली रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल का है। सीएमओ को दिए गए पत्र में पीड़ित दिलशाद ने बताया कि अस्पताल स्टाफ ने ऑपरेशन के नाम पर ४० हजार रुपये भी जमा करा लिए और उसकी पत्नी का गलत ऑपरेशन कर दिया जिसके कारण उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। बल्कि डॉक्टर ने मरीज के शरीर के अंदर की कोई नस काट दी जिसके चलते मेरे मरीज की हालत खराब हो गई। बाद में जबरदस्ती रेफर कराकर उन्हें पानीपत ले जाया गया जहां उनके इलाज में डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए। मुश्किल से उनकी जान बची।
पीड़ित ने डॉक्टर पर लगाया डिग्री न होने का आरोप पीड़ित ने डॉक्टर पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना डिग्री के डॉक्टर अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। पीड़ित ने सीएमओ को शिकायती पत्र देकर अस्पताल में बैठे डॉक्टरों की जांच की भी मांग की है। वहीं पीड़ित ने ४० हजार अस्पताल प्रशासन से वापस दिलाने की सीएमओ से मांग की है। लेकिन २ माह बीत जाने के बाद भी पीड़ित को अब तक इंसाफ नहीं मिल सका है।
अस्पताल प्रबंधन बना रहा है पीड़ित पर फैसले का दबाव पीड़ित ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक उन पर फैसला करने का दबाव बना रहे हैं। पंडित ने बताया कि उनकी पत्नी का ऑपरेशन जेंट्स डॉक्टर ने किया है। लेकिन अस्पताल प्रबंधक उनसे कह रहे हैं कि मरीज का ऑपरेशन लेडीज डॉक्टर द्वारा किया गया है। वही पीड़ित इंसाफ के लिए कोतवाली से लेकर सीएमओ कार्यालय का भी दरवाजा खटखटा रहे हैं। 2 माह बीत जाने के बाद भी पीड़ित को अब तक इंसाफ नहीं मिला है। यह तो समय के गर्भ में छिपा है कि पीड़ित को कब इंसाफ मिलेगा।
न्यायालय का दरवाजा खटखटायेगा पीडित ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगातार फैसले का दबाव बनाया जा रहा है और विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही की जा रही है जिस कारण वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर है।
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