पुलिस टीम पर गोलियां चलाने वाले को 7 साल की सजा: मुजफ्फरनगर कोर्ट ने आरिफ उर्फ गोलू पर लगाया 7 हजार का जुर्माना

पुलिस टीम पर गोलियां चलाने वाले को 7 साल की सजा: मुजफ्फरनगर कोर्ट ने आरिफ उर्फ गोलू पर लगाया 7 हजार का जुर्माना

मुजफ्फरनगर। पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से हमला करने के करीब आठ साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला मुजफ्फरनगर पुलिस और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के तहत चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत आया है।

अदालत ने 22 अगस्त 2026 को आरोपी आरिफ उर्फ गोलू को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 34 तथा आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दोषी माना। इसके बाद एडीजे और विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट कोर्ट नंबर चार मुजफ्फरनगर ने उसे सात वर्ष के कारावास और सात हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

यह मामला 30 जून 2018 का है। उस समय थाना नई मंडी पुलिस टीम संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को रुकने का इशारा किया। पुलिस के मुताबिक, मोटरसाइकिल सवार ने रुकने के बजाय पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी।

अचानक हुई फायरिंग के बाद पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी घायल हो गया। इसके बाद पुलिस टीम ने उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी की पहचान आरिफ उर्फ गोलू पुत्र जमशेद निवासी गांव फौलादपुर, थाना दोघट, जनपद बागपत के रूप में हुई।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से अवैध हथियार भी बरामद किए थे। घटना के संबंध में उपनिरीक्षक नरेश भाटी की ओर से थाना नई मंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के मामले में मुजफ्फरनगर के थाना नई मंडी में मु0अ0सं0 575/2018 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 34 में मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं अवैध हथियार की बरामदगी के संबंध में मु0अ0सं0 576/2018 के तहत आयुध अधिनियम की धारा 3/25 के अंतर्गत अलग मुकदमा दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। थाना नई मंडी पुलिस ने मामले की जांच पूरी करते हुए घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। जांच के बाद 10 सितंबर 2018 को आरोपी आरिफ उर्फ गोलू के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

आरोपी को सजा दिलाने के लिए ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मामले की प्रभावी पैरवी की। पुलिस के अनुसार, मुकदमे से जुड़े महत्वपूर्ण गवाहों को समय पर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। साथ ही मामले से संबंधित साक्ष्यों को भी अदालत के सामने मजबूती से रखा गया।

मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के दिशा निर्देश में मामले की पैरवी की गई। पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में मुकदमे की कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।

वहीं क्षेत्राधिकारी नई मंडी सुनील कुमार और थाना प्रभारी नई मंडी आनंद देव मिश्र के नेतृत्व में थाना स्तर से अभियोजन संबंधी कार्रवाई को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया गया।

अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता परविंदर कुमार, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप पुण्डीर और पैरोकार कांस्टेबल डोरीलाल ने अदालत में मामले की पैरवी की। अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।

आठ साल पुराने मामले में आया फैसला

घटना के करीब आठ साल बाद अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया। 22 अगस्त 2026 को एडीजे और विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट कोर्ट नंबर चार मुजफ्फरनगर ने आरिफ उर्फ गोलू को दोषी करार देते हुए सात साल के कारावास और सात हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

मुजफ्फरनगर पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को प्रभावी पैरवी के जरिए न्यायालय से सजा दिलाना है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी को मिली सजा को पुलिस जांच, साक्ष्य संकलन और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है।

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