दारुल उलूम की सुप्रीम पावर कमेटी मजलिस-ए-शूरा की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हुई। हालांकि बैठक संस्था के बजट को लेकर आयोजित की गई है लेकिन माना जा रहा है कि इसमें मदरसों के सर्वे को लेकर रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। ताकि 18 सितंबर को प्रदेश भर के 250 मदरसा संचालक की इस पर मोहर लगवाई जा सके। उधर, महंगाई के चलते इस बार दारुल उलूम का बजट 40 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।

तीन दिन पांच चरणों में आयोजित होने वाली दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा की सोमवार को पहली बैठक में संस्था के विभिन्न विभागों के प्रभारियों ने अपने-अपने विभाग की रिपोर्ट पेश की। दूसरे सत्र की बैठक देर रात तक जारी थी।

मदरसा सर्वे के मुद्दे पर भी हो सकती है चर्चा
संभावना जताई जा रही है कि बैठक में बजट के साथ-साथ दारुल उलूम द्वारा 18 सितंबर को मदरसा प्रबंधकों की बैठक में प्रदेश सरकार के सर्वे भी चर्चा हो सकती है। साथ ही एजेंडा तैयार कर 18 को होने वाले सम्मेलन में मदरसा प्रबंधकों की सहमति लेकर उस पर मोहर लगवाई जाएगी। वहीं बढ़ती महंगाई के चलते निर्माण कार्यो और संस्था के कर्मियों की तनख्वा समेत बढ़ोत्तरी किए जाने की घोषणा से उम्मीद जताई जा रही है।
शूरा की बैठक में दारुल उलूम मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, सदरुल मुदर्रिसीन (प्राचार्य)एवं जमीयत उलेमा ए हिंद के मुखिया मौलाना अरशद मदनी, असम के सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी, विधायक मौलाना इस्माइल मालेगांव, हकीम कलीमुल्लाह अलीगढ़, मौलाना हबीब बांदवी, मुफ्ती शफीक बेंगलुरु और मौलाना आकिल गढ़ी दौलत समेत कई अन्य लोग शामिल हुए।