बदायूं: अखिल भारत हिंदू महासभा ने उत्तर प्रदेश के बदायूं की जामा मस्जिद शम्सी की जगह नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा किया है। इस मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में वाद दायर किया गया है। इस मामले की सुनवाई आज बदायूं कोर्ट में होगी। कोर्ट में हिंदू पक्ष के 18 वकील इस मुद्दे पर बहस करेंगे। पिछले दिनों कोर्ट ने जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी और अखिल भारत हिंदू महासभा के बीच दायर हुए वाद की सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख दी थी। साथ ही सिविल जज सीनियर डिविजन विजय गुप्ता ने शम्सी जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी को भी अपना पक्ष रखने का आदेश दिया था।

पूरा मामला है
बता दें कि जिले के रेलवे स्टेशन से 4 किमी दूर जामा मस्जिद है। यह जामा मस्जिद देश की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिदों में शामिल है। इससे करीब 1.5 किमी दूर दरीबा मंदिर है। इस मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। हिंदू पक्ष की मानें तो जामा मस्जिद नीलकंठ महादेव मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। उनका कहना है कि ये वही शिवलिंग है, जो पहले नीलकंठ महादेव मंदिर में स्थापित था। वहीं, अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल, अरविंद परमार, ज्ञान प्रकाश, डॉक्टर अनुराग शर्मा और उमेश चंद्र शर्मा ने जामा मस्जिद शम्सी की जगह नीलकंठ मंदिर होने का दावा किया है। मुख्य याचिकाकर्ता अरविंद परमार ने बताया कि याचिका में पहले पक्षकार भगवान नीलकंठ महादेव महाराज बनाए गए हैं। साथ ही कोर्ट में दायर याचिका में जामा मस्जिद को राजा महिपाल का किला और नीलकंठ महादेव का मंदिर होने की बात कही गई है।

हिंदू पक्ष का दावा है कि
मुकदमे के पैरोकार और हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश सिंह पटेल का दावा है कि यहां पहले मंदिर था। इसको लेकर कुछ और साक्ष्य भी मिले हैं, जिन्हें वह कोर्ट में रखेंगे। मुकेश पटेल का कहना है कि जामा मस्जिद परिसर हिंदू राजा महिपाल का किला था। 1175 में पाल वंशीय राजपूत राजा अजयपाल ने मंदिर की मरम्मत कराई थी। बाद में मुगल शासकों के समय नीलकंठ महादेव मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाई गई थी। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को हटा दिया था। जिसे उस वक्त लोगों ने एक जगह स्थापित किया, जो आज पटियाली सराय में दरीबा मंदिर के नाम से जाना जाता है।
मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा
इंतजामिया कमेटी के सदस्य और मुस्लिम पक्ष के वकील इसरार अहमद सिद्दीकी का कहना है कि वह सुनवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने इंतजामिया कमेटी समेत वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया था। नोटिस तामील हुए हैं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। 15 सितंबर को ही पता लगेगा। अगर नोटिस तामिली की प्रक्रिया हो गई होगी, तो वो साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखेंगे। दूसरे पक्ष ने किस आधार पर दावा किया है। इसका भी विधिक प्रक्रिया के तहत नकल सवाल दाखिल कर दस्तावेज अदालत से मांगेंगे, ताकि हम और मजबूती से अपना पक्ष रख सकें। इसरार ने कहा, “जामा मस्जिद शम्सी लगभग 840 साल पुरानी है। मस्जिद का निर्माण शमसुद्दीन अल्तमश ने करवाया था। कोई भी ऐसा गजेटियर नहीं है, जिसमें यह मेंशन हो कि यहां मंदिर था। यह मुस्लिम पक्ष की इबादतगाह है। यहां मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं है। उन लोगों ने भी मंदिर के अस्तित्व का कोई कागज दाखिल नहीं किया है।”