सिसौली के स्कूल में पढ़ाई छोड़ कूड़ा उठाते दिखे बच्चे! वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सिसौली के स्कूल में पढ़ाई छोड़ कूड़ा उठाते दिखे बच्चे! वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

मुजफ्फरनगर। जनपद के सिसौली स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर-2 से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में विद्यालय के तीन बच्चे स्कूल परिसर से हरे रंग का कूड़ेदान लेकर बाहर आते और नगर पंचायत की कूड़ा उठाने वाली ई-रिक्शा में कचरा डालते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई कराने के बजाय उनसे स्कूल का कूड़ा-कचरा उठवाने का काम कराया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे इन आरोपों की अभी तक किसी अधिकारी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

वायरल वीडियो में कूड़ेदान लेकर बाहर आते दिखे बच्चे

सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में विद्यालय के तीन बच्चे नजर आ रहे हैं। बच्चों के हाथों में विद्यालय का हरे रंग का कूड़ेदान दिखाई दे रहा है। वीडियो में बच्चे विद्यालय परिसर से कूड़ेदान लेकर बाहर आते हैं और उसे नगर पंचायत की कूड़ा उठाने वाली ई-रिक्शा में खाली करते हुए नजर आते हैं।

वीडियो सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने वीडियो के आधार पर सवाल उठाया है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों से इस तरह का कार्य क्यों कराया जा रहा है।

ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर किया वायरल

बताया गया है कि स्थानीय ग्रामीणों ने बच्चों को विद्यालय से कूड़ेदान लेकर बाहर आते देखा। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि बच्चों से नियमित रूप से सफाई या कचरा उठाने जैसा कार्य कराया जाता है तो यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

‘पढ़ाई के समय बच्चों से क्यों कराया जा रहा काम?’

वायरल वीडियो को लेकर स्थानीय लोगों के बीच तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ग्रामीणों का मुख्य सवाल है कि यदि बच्चों से वास्तव में विद्यालय का कूड़ा उठवाया गया है तो इसके पीछे क्या वजह थी और उन्हें यह कार्य किसके निर्देश पर करना पड़ा।

लोगों ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वायरल वीडियो की वास्तविकता सामने आनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि बच्चों को कूड़ेदान लेकर बाहर भेजने की परिस्थितियां क्या थीं।

वीडियो से आरोप सामने आए, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल इस मामले में वायरल वीडियो ही चर्चा का मुख्य आधार है। वीडियो में बच्चों को ई-रिक्शा में कूड़ा डालते हुए देखा जा सकता है, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि बच्चों से यह कार्य किसके निर्देश पर या किन परिस्थितियों में कराया गया।

मामले की वास्तविक तस्वीर शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। जांच में यह भी स्पष्ट हो सकता है कि घटना एक सामान्य परिस्थिति का हिस्सा थी या वास्तव में बच्चों को पढ़ाई के समय कूड़ा उठाने का कार्य सौंपा गया था।

बेसिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजर

वीडियो वायरल होने के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें बेसिक शिक्षा विभाग की ओर हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि मामले की जांच कर वायरल वीडियो की सच्चाई सामने लाई जाए। साथ ही यदि जांच में बच्चों से अनुचित कार्य कराए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक जांच या कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि वायरल वीडियो के पीछे पूरा मामला क्या है।

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