लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ी कार्रवाई: 15 मौतों वाली अवैध इमारत पर ध्वस्तीकरण नोटिस, 15 दिन में जवाब तलब

लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ी कार्रवाई: 15 मौतों वाली अवैध इमारत पर ध्वस्तीकरण नोटिस, 15 दिन में जवाब तलब

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित जिस दो मंजिला इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई थी अब उसे ध्वस्त किया जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की ओर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में इस बिल्डिंग को अवैध करार दिया गया है। विभाग ने बिल्डिंग की दीवार पर बुधवार को नोटिस चस्पा कर 15 दिन में मालिक से जवाब मांगा है। उचित जवाब न मिलने पर इमारत को गिरा दिया जाएगा।

इस संबंध में बुधवार को एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि जिस बिल्डिंग में आग लगी थी वह अवैध थी। 2016 में ही उसे गिराने आदेश हुआ था। बाद में उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था। यह बिल्डिंग रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंडमैनेजमेंट कॉलेज के मालिक वीरेंद्र शुक्ला की है।

एलडीए की रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।

हालांकि, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई। इसके बाद एलडीए ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि 22 जून को इस बिल्डिंग में आग लग गई थी। इस आग की चपेट में बिल्डिंग में बना एक कोचिंग सेंटर आ गया था। इस अग्निकांड हादसे में छात्र—छात्राओं समेत 15 लोगों की जान चली गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया। इसके बाद गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर वीरेंद्र शुक्ला समेत चार लोगों को जेल भेज दिया था। फायर विभाग, एलडीए समेत छह अधिकारी भी निलंबित किए गए थे। इस घटना के बाद अब लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, आगरा समेत प्रदेशभर के सभी शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटर्स में ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है। फायर सिस्टम न होना, मानक के विपरीत पाये जाने वाले कोचिंग सेंटर सील किए जा रहे हैं।

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