रीता का मजदूरी करने से मालिक बनने तक का सफर

रीता का मजदूरी करने से मालिक बनने तक का सफर

सहारनपुर। विंस्टन चर्चिल के अनुसार एक निराशावादी हर अवसर में कठिनाई देखता है जबकि एक आशावादी कठिनाइयों में भी अवसर तलाश लेता है। इसी तथ्य को सही साबित कर दिखाया है विकासखंड मुजफ्फराबाद के गांव बाबेल बुजुर्ग निवासी श्रीमती रीता देवी ने। जिन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा इनके जीवन में निर्धनता एवं जटिलताओं के सिवा कुछ नहीं था। पति के साथ घर की आमदनी का मुख्य जरिया दैनिक मजदूरी ही थी। जिससे घर का गुजारा नहीं चल पाता था।

ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह के सदस्य होने से इनको एक आशा की किरण दिखाई दी, स्वरोजगार की इच्छा इनके मन में थी इनका मन था कि इनका खुद का रोजगार हो। एक दिन समूह सखी के माध्यम से उनके गांव में पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम से प्रभावित होकर इन्होंने उद्यमिता विकास कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अक्टूबर 2021 में छह दिवसीय प्रशिक्षण लिया। रीता के अनुसार यह प्रशिक्षण अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक था।

उन्होंने उत्साहपूर्वक सभी गतिविधियों में भाग लिया और ज्ञान अर्जित किया। व्यवसाय प्रबंधन, मार्केटिंग, मार्केट सर्वे, व्यवहार कुशलता और व्यवसाय प्रबंधन के गुण सीखे अपने घर की जमा पूंजी और स्वयं सहायता समूह से कुछ पैसे लेकर इन्होंने अपने घर में ही कॉस्मेटिक्स शॉप खोला। जब इन्होंने कार्य जोड़ा तो इनकी गांव में आलोचना भी हुई परन्तु इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे दुकान में दैनिक जरूरतों के सामान रखना शुरु कर दिया और आज पांच से आठ हजार रूपये आमदनी कर लेती हैं और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनी हुई हैं।

कार्यक्रम के संयोजक अमित कुमार चौबे ने बताया की प्रशिक्षण के दौरान झाड़ू निर्माण, दोना पत्तल निर्माण, दुकानदारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और व्यवसाय प्रबंधन के गुण सिखाए गये। ग्रामीण परिवेश में कैसे व्यवसाय शुरू किया जाए इसका विधिवत प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण से रीता देवी की गांव में अलग पहचान है उन्होंने अपना सफर यही नहीं रोका गांव की अन्य गरीब महिलाओं को पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की ओर प्रशिक्षण के लिए भेजा और लगातार उनके स्वरोजगार के लिए प्रयास कर रहे हैं। रीता देवी अपनी आर्थिक दशा सुधारने में सफल रहीं। अब इनका जीवन सुखद है और इनकी इच्छा है कि इनका व्यवसाय आगे बढ़े, जिससे पति-पत्नी इस व्यवसाय को चला सके। उन्होंने गांव की महिलाओं को यह संदेश दिया कि खुद का रोजगार करें मजदूरी की कमाई ज्यादा दिन तक नहीं होती।

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