राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर नई व्यवस्था बने, शंकराचार्यों और अयोध्या के प्रतिनिधियों को मिले जिम्मेदारी: अजय राय

राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर नई व्यवस्था बने, शंकराचार्यों और अयोध्या के प्रतिनिधियों को मिले जिम्मेदारी: अजय राय

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता हन्नान मोल्लाह ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद, अग्निवीर योजना, भाजपा और उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर अजय राय ने कहा, “ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है। संबंधित पदाधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि मामले में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कई लोग शामिल हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अजय राय ने कहा, “हमारी पार्टी को मौजूदा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। हमारी मांग है कि राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें चारों पीठों के शंकराचार्यों, प्रमुख धर्माचार्यों और अयोध्या के स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा स्थापित हो सकेगा।”

 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े मामलों में व्यापक स्तर पर जांच कराई जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि केवल चढ़ावे ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े मामलों की भी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सीपीआई(एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान अयोध्या जाकर राम मंदिर में दर्शन नहीं करने के मुद्दे पर कहा, “भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। भाजपा ने राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाया है और अब ऐसे मामलों पर जनता स्वाभाविक रूप से सवाल उठा रही है।” उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा सरकार बनने के दावे पर भी मोल्लाह ने टिप्पणी की।

 

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने दावे करते रहते हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है। उनके अनुसार, चुनावी परिणाम जनता के जनादेश से तय होंगे, न कि केवल राजनीतिक बयानों से। वहीं, अग्निवीर योजना में संभावित बदलाव के संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई(एम) नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरुआत से ही इस योजना का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चार वर्ष की सेवा अवधि सैनिकों और सेना, दोनों के हित में नहीं है। उनके अनुसार, पहले सैनिकों को लंबी अवधि तक प्रशिक्षण और सेवा का अवसर मिलता था, जिससे सेना की क्षमता मजबूत होती थी। मोल्लाह ने कहा कि चार साल की सेवा के बाद बड़ी संख्या में युवाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है। उनका कहना था कि यदि सरकार अब इस योजना में बदलाव कर लंबे समय तक सेवा का प्रावधान करने पर विचार कर रही है, तो यह सकारात्मक कदम होगा। अनुभव के आधार पर सरकार को इस योजना की समीक्षा करनी चाहिए।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *