मैक्स अस्पताल वैशाली ने यूपी के हापुड़ में की ओपीडी की शुरुआत,किडनी संबंधी मरीज इस ओपीडी में ले सकेंगे विशेषज्ञों की राय

हापुड़। जनपद हापुड़ मे उत्तर भारत और पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध मैक्स सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल वैशाली ने अपनी हेल्थ सेवाओं को और विस्तार देते हुए बुधवार को हापुड़ के साबली रोड के आनंद विहार स्थित आरोग्यम सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर अस्पताल ने अपनी ओपीडी सेवा शुरू की है यहां किडनी से जुड़ी बीमारी और किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर मरीज स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को दिखा सकेंगे। इस ओपीडी का लाभ मरीज हर रविवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक यहां डॉक्टरों को दिखा सकेंगे। आपको बता दें कि बुधवार को रॉयल पैलेस में मीटिंग कर मैक्स अस्पताल वैशाली में नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट के सीनियर डायरेक्टर डॉक्टर मनोज सिंघल ने इस लॉन्च इवेंट को संबोधित किया ।उन्होंने बताया कि अब इस ओपीडी के शुरू होने से हर तबके के मरीज,चाहे वो आर्थिक रूप से कमजोर ही क्यों न हो,
सब यहां आ सकेंगे और उनका बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित हो सकेगा। क्योंकि पिछले एक दशक में क्रोनिक किडनी डिसीज़ के मरीजों की संख्या लगभग डबल हो गई है और इसकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है एक अनुमान के हिसाब से भारत में करीब 10 फीसदी वयस्क आबादी किसी न किसी तरह की किडनी संबंधी बीमारी यानी गुर्दे की बीमारी से ग्रसित है डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के कारण किडनी से जुड़ी दिक्कतें ज्यादा हो रही हैं, और क्रोनिक किडनी डिसीज़ के करीब 60 फीसदी केस ऐसे ही हैं. ऐसे में इस बीमारी से अलर्ट रहने की जरूरत है.
हापुड़ में ओपीडी सेवा के शुभारंभ के अवसर पर डॉक्टर मनोज सिंघल ने कहा, ”डायबिटीज और हाइपरटेंशन से बचाव के साथ ही अगर लोग अपने खाने-पीने में नमक का कम इस्तेमाल करें तो इससे भी किडनी को नुकसान पहुंचने से बचाया जा सकता है. प्रोसेस्ड फूड की जगह अगर ताजे फल और सब्जियां खाए जाएं तो शरीर को तरोताजा रखने में मदद मिलती है. खासकर, हेल्दी चीजें पीने से किडनी से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा काफी कम हो जाता है. स्मोकिंग करने से भी स्थिति बिगड़ जाती है क्योंकि इससे किडनी तक जाने वाले ब्लड का फ्लो धीमा पड़ जाता है और फिर धीरे-धीरे उसकी फंक्शनिंग पर असर पड़ने लगता है, जिससे किडनी डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है.”
जब किसी इंसान की किडनी ब्लड से गंदगी और विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करना बंद कर देती है तो किडनी फेल होने या क्रोनिक किडनी डिसीज़ होने की आशंका बढ़ जाती है. हालांकि, इसमें सुधार कर पाना मुश्किल होता है लेकिन अगर समय पर बीमारी का पता लगा लिया जाए और तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाए तो बीमारी बढ़ने के चांस घटने की उम्मीद रहती है।

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