मुज़फ्फरनगर। कलेक्ट्रेट परिसर उस समय कुछ देर के लिए आपदा स्थल में तब्दील नजर आया, जब इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में आग लगने और लोगों के फंसने की काल्पनिक सूचना पर व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस और आपदा प्रबंधन की टीमें तत्काल सक्रिय हो गईं। सायरन बजते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर में राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया।

जिलाधिकारी Umesh Mishra के निर्देशन में नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस मेगा मॉक ड्रिल का उद्देश्य आग जैसी आपात परिस्थितियों में प्रशासनिक तैयारियों को परखना और आम नागरिकों को जागरूक करना था। अभ्यास के दौरान यह दर्शाया गया कि किसी भवन में आग लगने या लोगों के फंसने की स्थिति में प्रशासनिक तंत्र किस तरह त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया देता है।

मॉक ड्रिल का सबसे आकर्षक हिस्सा इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की छत पर फंसे दो लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन रहा। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और विशेष सीढ़ियों व सुरक्षा उपकरणों की मदद से दोनों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इसके बाद घायलों को तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अनिरुद्ध प्रताप सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर ने कहा कि किसी भी आपदा के समय घबराने के बजाय संयम और सूझबूझ सबसे बड़ा हथियार होता है। उन्होंने कहा कि समय पर की गई सही कार्रवाई से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह और आपदा प्रबंधन ट्रेनर जैकी कुमार ने गैस सिलेंडर में आग लगने जैसी घटनाओं से निपटने के व्यावहारिक तरीके भी बताए। उन्होंने लोगों को प्राथमिक सुरक्षा उपायों और त्वरित बचाव तकनीकों की जानकारी दी।
मॉक ड्रिल में सिविल डिफेंस, पुलिस प्रशासन, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और आपदा मित्रों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, सरकारी कर्मचारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने इस अभ्यास के माध्यम से आपदा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

