मुजफ्फरनगर। जनपद में बिजली संकट और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंगलवार को विकास भवन में आयोजित समीक्षा बैठक उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और विद्युत विभाग के चीफ इंजीनियर विनोद गुप्ता के बीच तीखी बहस हो गई। बैठक के दौरान मंत्री ने चीफ इंजीनियर की कार्यशैली और कथित तौर पर उनकी भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई। इस दौरान दोनों के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

विकास भवन में आयोजित बैठक में बिजली कटौती, विकास कार्यों और बिजली घरों की क्षमता वृद्धि से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की जा रही थी। बैठक में विद्युत विभाग, मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इसी दौरान बिजली विभाग के प्रस्तावों और उपभोक्ताओं से जुड़े मामलों पर चर्चा के बीच माहौल गर्म हो गया।

बैठक के दौरान मंत्री अनिल कुमार ने चीफ इंजीनियर से कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ विभाग का व्यवहार शालीन और संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी को राजनीति करनी है तो पहले नौकरी छोड़कर मैदान में उतरना चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकारियों की भाषा प्रशासनिक गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी जैसी।
मंत्री ने कथित तौर पर अखबारों में प्रकाशित चीफ इंजीनियर के बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि एक अधिकारी को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकारियों का दायित्व जनता की समस्याओं का समाधान करना है, न कि विवाद खड़ा करना।
वहीं चीफ इंजीनियर विनोद गुप्ता ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि बिजली घरों की क्षमता वृद्धि और अन्य परियोजनाओं के प्रस्ताव समय पर शासन को भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि कई प्रस्ताव लखनऊ भेजे गए, लेकिन लाइन लॉस और अन्य तकनीकी कारणों के चलते उनमें से केवल कुछ ही स्वीकृत हो सके। उन्होंने कहा कि विभाग ने अपने स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की थी।
मंत्री ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि प्रस्ताव विभाग की संस्तुति के साथ भेजे गए थे तो वे अस्वीकृत कैसे हो गए। उन्होंने संबंधित फाइलें और रिपोर्ट तलब करने के निर्देश दिए तथा पूरे मामले की समीक्षा कराने की बात कही।
बैठक के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि चीफ इंजीनियर कथित तौर पर नाराज होकर अपनी कुर्सी छोड़कर जाने लगे। हालांकि बैठक में मौजूद अधिकारियों और अन्य लोगों ने उन्हें समझाकर शांत कराया, जिसके बाद बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
इस विवाद की पृष्ठभूमि भी हाल के दिनों में बिजली संकट को लेकर हुए घटनाक्रम से जुड़ी बताई जा रही है। दो दिन पहले गांधी कॉलोनी बिजलीघर पर ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इसी दौरान बिजली कटौती से नाराज कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्युत विभाग की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान विभागीय कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई। इस संबंध में पुलिस ने विभाग की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य अभियंता कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव लगातार बना हुआ था, जिसकी झलक मंगलवार की समीक्षा बैठक में भी देखने को मिली।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह बनाने का है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में बिजली संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं, इसलिए विभागीय अधिकारियों को जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह हैं और अधिकारियों को भी प्रशासनिक मर्यादा का पालन करते हुए संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

