मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में गांव तिस्सा निवासी रवि कुमार ने थाना सिविल लाइन में लिखित शिकायत देकर जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने अहिल्याबाई चौक के निकट फोटोस्टेट की दुकान संचालित करने वाले मुजम्मिल पर अपने व्हाट्सऐप स्टेटस और इंस्टाग्राम खाते पर आरएसएस के संबंध में आपत्तिजनक सामग्री साझा करने का आरोप लगाया है।

शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित सामग्री से संगठन से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि ऐसी सामग्री से क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

स्क्रीनशॉट और डिजिटल साक्ष्य सौंपने का दावा
गांव तिस्सा, थाना भोपा क्षेत्र निवासी रवि कुमार ने थाना प्रभारी सिविल लाइन को दिए प्रार्थना पत्र में कथित सोशल मीडिया पोस्ट और स्टेटस के स्क्रीनशॉट सहित डिजिटल साक्ष्य संलग्न करने की बात कही है। उन्होंने पुलिस से इन साक्ष्यों की बारीकी से जांच कराने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कथित सामग्री किस सोशल मीडिया खाते से साझा की गई और उसमें क्या लिखा या दिखाया गया था। उन्होंने संबंधित पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच कर मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग
रवि कुमार ने अपने प्रार्थना पत्र में मांग की है कि उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों का परीक्षण कर सभी आरोपों की निष्पक्षता से जांच की जाए। यदि जांच में किसी कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता ने स्वयं को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े संगठन का कार्यकर्ता बताया है। उनका कहना है कि मामले में समय रहते उचित कार्रवाई होने से क्षेत्र में शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी मामले की स्थिति
फिलहाल यह मामला पुलिस को दी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित है। कथित पोस्ट की वास्तविक सामग्री, उसकी प्रामाणिकता और उससे किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने या किसी अन्य कार्रवाई के संबंध में भी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
संबंधित व्यक्ति का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

