मुजफ्फरनगर। विभिन्न मांगों को लेकर पिछले आठ दिनों से आंदोलन कर रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। प्रदेश स्तर पर मिशन निदेशक के साथ हुई वार्ता में कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद मुजफ्फरनगर समेत प्रदेशभर के संविदा कर्मचारी सत्रह अक्टूबर से अपने काम पर लौट आए। आंदोलन समाप्त होने और कर्मचारियों की वापसी से स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की दिशा में राहत मिली है। कर्मचारी नेताओं ने वार्ता को संविदा कर्मियों की आर्थिक सुरक्षा, वेतन और सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारी न्यूनतम वेतन नीति लागू करने, वरिष्ठता के आधार पर वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि, अवकाश सुविधाएं, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और नियमित पदों पर नियुक्ति के दौरान वरीयता देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रदेश प्रतिनिधिमंडल और मिशन निदेशक के बीच कई दौर की बातचीत के बाद इन मांगों पर सहमति बनने की जानकारी दी गई। हालांकि, कर्मचारियों की सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता जैसे मुद्दे अभी लंबित हैं। अब कर्मचारियों को सहमत मांगों के संबंध में शासनादेश जारी होने और निर्णयों को धरातल पर लागू किए जाने का इंतजार है।

न्यूनतम वेतन नीति बनाने पर बनी सहमति
संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांग प्रदेशभर में एक समान न्यूनतम वेतन नीति निर्धारित करना है। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, वार्ता में सभी संविदा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतनमान तय करने और वरिष्ठता के आधार पर वेतन में वृद्धि की व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी है। इस संबंध में शासन की ओर से पैंतालीस दिन का समय मांगा गया है। वेतन वृद्धि के लिए राज्य सरकार के बजट से व्यवस्था किए जाने पर भी सहमति बनने की बात कही गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत लंबे समय से सेवाएं देने वाले संविदा कर्मियों को अभी वेतन और सेवा संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्पष्ट वेतन नीति लागू होने से कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है। वरिष्ठता के आधार पर वेतन वृद्धि की व्यवस्था बनने से लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को उनके अनुभव और सेवाकाल के अनुरूप लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति शासनादेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
ग्रेच्युटी और ईपीएफ की सुविधा का मिलेगा लाभ
कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी ग्रेच्युटी तथा कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ की मांग पर भी सकारात्मक सहमति बनने की जानकारी दी गई है। कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, इन सुविधाओं के लिए राज्य सरकार के बजट से व्यवस्था किए जाने पर सहमति बनी है।
संविदा कर्मचारी लंबे समय से इन सुविधाओं को अपनी सेवा शर्तों में शामिल करने की मांग कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में वर्षों तक योगदान देने के बावजूद भविष्य की आर्थिक सुरक्षा उनके लिए एक बड़ी चिंता बनी रहती है। ग्रेच्युटी और ईपीएफ की व्यवस्था लागू होने से उन्हें भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ किस प्रकार और किन शर्तों पर दिया जाएगा, यह संबंधित शासनादेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव, पंद्रह दिन के विशेष अवकाश पर सहमति
वार्ता के दौरान अवकाश से जुड़ी मांगों पर भी चर्चा हुई। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव यानी बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश और सभी कर्मचारियों के लिए पंद्रह दिन के विशेष अवकाश की सुविधा पर सहमति बनी है। इस संबंध में जल्द शासनादेश जारी होने की उम्मीद जताई गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि अवकाश की बेहतर व्यवस्था होने से उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से महिला कर्मचारियों के लिए बच्चों की देखभाल के उद्देश्य से अवकाश की सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, इन सुविधाओं की पात्रता, नियम और लागू होने की तारीख शासनादेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कर्मचारियों और उनके परिजनों को दस लाख रुपये तक कैशलेस बीमा
संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में स्वास्थ्य बीमा भी शामिल थी। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, कर्मचारियों और उनके परिजनों को दस लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है। इस व्यवस्था के लागू होने से कर्मचारियों के परिवारों को इलाज के दौरान होने वाले खर्च के बोझ से राहत मिलने की उम्मीद है।
कर्मचारी संगठनों ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिलना जरूरी है। कैशलेस बीमा की सुविधा उपलब्ध होने से गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं। फिलहाल इस सुविधा को लागू करने के लिए संबंधित औपचारिकताओं और शासन स्तर की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है।
नियमित नियुक्तियों में वरीयता देने के लिए शासनादेश जारी करने पर जोर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों की एक अन्य महत्वपूर्ण मांग नियमित पदों पर होने वाली नियुक्तियों में वरीयता देने से संबंधित है। कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, वार्ता में इस संबंध में शासनादेश शीघ्र जारी करने पर सहमति बनी है।
कर्मचारियों का कहना है कि मिशन के अंतर्गत लंबे समय तक काम करने के कारण उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और विभागीय कार्यप्रणाली का पर्याप्त अनुभव प्राप्त होता है। ऐसे में नियमित पदों पर भर्ती के दौरान उन्हें वरीयता दिए जाने से उनके अनुभव को उचित महत्व मिल सकेगा।
इसके अलावा सात, दस और पंद्रह वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को लॉयल्टी बोनस देने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष भेजने पर सहमति बनने की जानकारी भी दी गई है। इस मांग पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर से लिया जाना है। ऐसे में कर्मचारियों को इस संबंध में आगे होने वाली कार्रवाई का इंतजार रहेगा।
टीबी कार्यक्रम के कर्मचारियों के मोबिलिटी भत्ते पर भी सहमति
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले दो हजार रुपये के मोबिलिटी भत्ते को सीधे वेतन में शामिल करने की मांग पर भी सकारात्मक सहमति बनने की जानकारी दी गई है। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, इस संबंध में शासनादेश जल्द जारी होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों के संचालन के लिए लगातार भ्रमण करते हैं। ऐसे में मोबिलिटी भत्ता उनके कार्य से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस भत्ते को वेतन में शामिल करने की मांग उठा रहे थे। अब इस दिशा में आगे की प्रक्रिया शासन स्तर पर पूरी की जानी है।
महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ते पर नहीं बनी सहमति
वार्ता में कर्मचारियों की सभी मांगें पूरी नहीं हो सकीं। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता दिए जाने की मांग पर सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि, उपलब्धता के आधार पर संविदा कर्मचारियों को आवास आवंटित करने की उचित प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में तैनाती के दौरान आवास की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सरकारी आवास उपलब्ध होने की स्थिति में उनके आवंटन की प्रक्रिया से कुछ कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। इसके बावजूद महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता जैसे मुद्दे कर्मचारियों की मांगों में बने हुए हैं।
आंदोलन में शामिल कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं होगी
आठ दिन तक चले आंदोलन के दौरान धरने और प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ किसी प्रकार की अनुशासनात्मक या उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी सहमति बनने की जानकारी दी गई है। कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, आंदोलन में भाग लेने के कारण किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह आश्वासन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आंदोलन समाप्त होने के बाद काम पर लौटने वाले कर्मचारियों को अपने खिलाफ संभावित कार्रवाई की चिंता थी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस बिंदु पर सहमति बनने से कर्मचारियों को राहत मिली है और वे अब अपनी नियमित जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने मीडिया का जताया आभार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने आंदोलन के दौरान सहयोग करने वाली जनपद की समस्त मीडिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मीडिया के साथियों ने निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और आम जनता तक पहुंचाया। इससे कर्मचारियों की मांगों को मजबूती मिली और उनकी समस्याएं सार्वजनिक रूप से सामने आईं।
डॉ. सचिन जैन ने कहा कि आंदोलन के दौरान मीडिया ने कर्मचारियों के मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने इसके लिए सभी मीडिया प्रतिनिधियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारी उनके सहयोग के लिए आभारी रहेंगे।
इसके बाद डॉ. राहुल वर्मा ने भी मीडिया को वार्ता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश प्रतिनिधिमंडल और मिशन निदेशक के बीच कई दौर की बातचीत के बाद कर्मचारियों की आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है। अब कर्मचारियों को संबंधित आदेश जारी होने और सहमतियों को लागू किए जाने का इंतजार है।
सीएमओ से मिले कर्मचारी, एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मनाई खुशी
आंदोलन समाप्त होने के बाद मुजफ्फरनगर के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी अपने काम पर लौट आए। वापसी के बाद कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मुलाकात कर आंदोलन के दौरान मिले सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस दौरान कर्मचारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी भी जाहिर की।
आठ दिन तक चले आंदोलन के बाद कर्मचारी अब नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अपने कार्यों में जुट गए हैं। कर्मचारी नेताओं को उम्मीद है कि शासन की ओर से निर्धारित समय के भीतर वेतन नीति और अन्य सहमत मांगों पर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। हालांकि, आंदोलन की समाप्ति के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण सहमत मांगों को वास्तविक रूप से लागू कराने का होगा।
फिलहाल लिखित आश्वासन और वार्ता में बनी सहमति के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। कर्मचारियों की मांगों पर बनी सहमति को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन वेतन, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश और बीमा जैसी सुविधाओं का वास्तविक लाभ संबंधित शासनादेश जारी होने और व्यवस्था लागू होने के बाद ही मिल सकेगा।

