मुजफ्फरनगर। एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक के जरूरी दस्तावेज हासिल करने और उनके आधार पर फर्जी फर्म बनाकर करीब 248 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करने के कथित मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अनुमोदन मिलने के बाद साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह ने गिरोह के कथित सरगना रमेश कुमार समेत सात आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) की धारा 2/3 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य नौकरी और अन्य लाभ दिलाने का लालच देकर लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों का इस्तेमाल फर्जी फर्में पंजीकृत कराने और कथित तौर पर बिना वास्तविक वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी बिल तथा ई-वे बिल तैयार करने में किया जाता था। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने संगठित अपराध के आरोप में आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की है।

रतनपुरी के बड़सू गांव के युवक को नौकरी का झांसा
मामला मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र के गांव बड़सू निवासी अश्वनी कुमार से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, अश्वनी कुमार को एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया गया था। इसी बहाने उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल, हाईस्कूल की अंकतालिका समेत कई जरूरी दस्तावेज हासिल कर लिए गए।
आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर अश्वनी कुमार के नाम से ‘एके ट्रेडर्स’ नाम की फर्म पंजीकृत कराई गई। इसके बाद इस फर्म के नाम पर करीब 248 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए गए। पुलिस का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया का इस्तेमाल अवैध आर्थिक लाभ अर्जित करने और कर संबंधी धोखाधड़ी करने के लिए किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2024 में थाना साइबर क्राइम, मुजफ्फरनगर में मुकदमा अपराध संख्या 26/2024 दर्ज किया गया था। शुरुआत में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
एसटीएफ मेरठ की जांच में सामने आए सात आरोपी
प्रकरण की शुरुआती विवेचना निरीक्षक सतेंद्र नागर ने की थी। बाद में अपर पुलिस महानिदेशक, कानून-व्यवस्था के विशेष निर्देश पर जांच एसटीएफ की अनुसंधान शाखा मेरठ को स्थानांतरित कर दी गई।
एसटीएफ की जांच के दौरान कथित गिरोह के सरगना रमेश कुमार समेत सात लोगों के नाम सामने आए। पुलिस के अनुसार, गिरोह राजस्थान, दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय था। आरोप है कि इसके सदस्य लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर फर्जी फर्में पंजीकृत कराते थे। इसके बाद वास्तविक वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति किए बिना फर्जी कर चालान और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे।
विवेचना के दौरान धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने समेत अन्य संबंधित अपराधों के पहलुओं की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ अलग-अलग तारीखों में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
पांच आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में ओमप्रकाश, रतनाराम, संतोष कुमार, बुद्धराम और हनुमानराम को 28 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उस समय आरोपियों के कब्जे से 13 मोबाइल फोन, एक प्रिंटर, विभिन्न कंपनियों की बिल बुक, चार कंपनियों की रबर मोहर, एक स्टांप पैड, एक नंबरिंग मशीन, चार कंपनियों की चेक बुक और तीन वाहन बरामद किए जाने की जानकारी दी गई थी।
पुलिस के मुताबिक, इन पांच आरोपियों के खिलाफ 19 सितंबर 2025 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके बाद आरोपी जाहिद के खिलाफ 10 अप्रैल 2026 को और कथित सरगना रमेश कुमार के खिलाफ 2 सितंबर 2026 को आरोपपत्र दाखिल किया गया।
पुलिस ने बताया कि इस मामले से संबंधित कार्यवाही न्यायालय में विचाराधीन है। अब गिरोह के सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
सरगना रमेश कुमार समेत सात लोगों पर गैंगस्टर एक्ट
जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अनुमोदन मिलने के बाद सातों आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 2/3 के तहत नया मुकदमा दर्ज कराया गया है।
नामजद आरोपियों में कथित सरगना रमेश कुमार निवासी भवानीपुरा चालकना, थाना सेडवा, जिला बाड़मेर, राजस्थान शामिल है। इसके अलावा ओमप्रकाश और रतनाराम निवासी गोलिया गरवा, थाना आरजीटी नगर, जिला बाड़मेर; संतोष कुमार और बुद्धराम निवासी डाबड़, थाना गुड़ामालानी, जिला बाड़मेर; हनुमानराम निवासी गोलिया गरवा, जिला बाड़मेर तथा जाहिद निवासी जगतपुर, थाना वजीराबाद, उत्तर दिल्ली के नाम शामिल हैं।
पुलिस का आरोप है कि गिरोह ने पहचान संबंधी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्मों तथा बिलों के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का काम किया। गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई का उद्देश्य कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाना है।
नौकरी के नाम पर दस्तावेज देने वालों को सतर्क रहने की जरूरत
यह मामला नौकरी दिलाने के नाम पर व्यक्तिगत दस्तावेज हासिल कर उनके कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक संबंधी जानकारी और अन्य पहचान दस्तावेज किसी व्यक्ति या संस्था को देने से पहले उसकी विश्वसनीयता और उद्देश्य की पुष्टि करना जरूरी है।
पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, दस्तावेजों का इस्तेमाल संबंधित युवक की जानकारी और सहमति के बिना फर्म पंजीकरण के लिए किया गया। फिलहाल प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है और आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

