मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली में वाहनों के प्रवेश और संचालन को लेकर नई व्यवस्था लागू की जा रही है। आगामी 1 नवंबर 2026 से निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों पर प्रतिबंध लागू होगा। इस व्यवस्था को देखते हुए मुजफ्फरनगर परिवहन विभाग ने जिले के वाहन स्वामियों, मालवाहक वाहन संचालकों और बस मालिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि दिल्ली जाने से पहले वे अपने वाहन की श्रेणी, पंजीकरण और उत्सर्जन मानकों से जुड़ी पात्रता की जांच कर लें। विभाग ने कहा है कि प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले वाहन लेकर दिल्ली जाने से बचें, ताकि रास्ते में प्रवेश संबंधी परेशानी या व्यावसायिक गतिविधियों में रुकावट का सामना न करना पड़े।

सीएक्यूएम के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग सक्रिय
मुजफ्फरनगर परिवहन विभाग के अनुसार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए वाहनों से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका संबंध दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक मालवाहक वाहनों और यात्री बसों से है।
इस संबंध में मेरठ परिक्षेत्र के उप परिवहन आयुक्त की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किया गया था। इसी के क्रम में मुजफ्फरनगर के वाहन स्वामियों को नए प्रावधानों की जानकारी दी गई है। विभाग के मुताबिक, वाहनों के लिए निर्धारित अनुमन्य अवधि 31 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगी। इसके बाद 1 नवंबर से लागू पात्रता के आधार पर ही संबंधित वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।
बीएस-VI मानकों वाले वाहनों को लेकर जारी निर्देश
जारी जानकारी के अनुसार, निर्धारित प्रावधानों के तहत पात्र बीएस-VI डीजल, सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों पर लागू नियमों के अनुसार प्रतिबंध रहेगा।
ऐसे में दिल्ली में माल की आपूर्ति करने वाले कारोबारियों, परिवहन कंपनियों और बस संचालकों के लिए जरूरी है कि वे यात्रा से पहले अपने वाहनों की पात्रता की पुष्टि कर लें। केवल वाहन के पंजीकरण दस्तावेजों की जांच करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लागू उत्सर्जन मानकों और संबंधित छूट के प्रावधानों की जानकारी लेना भी जरूरी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना और दिल्ली तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके लिए संबंधित वाहनों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।
1 नवंबर से 31 जनवरी तक विशेष प्रतिबंध का प्रावधान
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की ओर से 23 जून 2026 को जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया गया है कि 1 नवंबर से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे मोटर वाहनों के दिल्ली में चलने पर प्रतिबंध रहेगा, जो बीएस-VI से नीचे के उत्सर्जन मानकों वाले हैं।
हालांकि, अधिसूचना में कुछ विशेष अपवादों और छूट का प्रावधान भी बताया गया है। ऐसे में वाहन स्वामियों को अपने वाहन की श्रेणी के साथ यह भी जांचना चाहिए कि वह किसी निर्धारित अपवाद या छूट के दायरे में आता है या नहीं। किसी भी वाहन को प्रतिबंध से मुक्त मानने से पहले संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी होगा।
माल ढुलाई और बस संचालन पर पड़ सकता है असर
दिल्ली में नियमित रूप से सामान पहुंचाने वाले कारोबारियों, मालवाहक वाहन संचालकों और यात्री बसों के लिए यह व्यवस्था खास महत्व रखती है। पात्रता पूरी नहीं करने वाले वाहन को दिल्ली ले जाने पर प्रवेश में बाधा आ सकती है, जिससे माल की आपूर्ति, परिवहन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।
इसलिए परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय की परेशानी से बचने के लिए पहले ही अपने वाहन के दस्तावेज, पंजीकरण और उत्सर्जन संबंधी जानकारी की जांच कर लें। दिल्ली जाने की योजना बनाने से पहले लागू नियमों और छूट की शर्तों को समझना भी जरूरी है।
वाहन स्वामियों से नियमों का पालन करने की अपील
मुजफ्फरनगर के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) ने जिले के वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे दिल्ली यात्रा से पहले अपने वाहन की पात्रता सुनिश्चित करें और प्रतिबंधित श्रेणी के वाहन लेकर न निकलें।
परिवहन विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है। वाहन स्वामियों की जागरूकता और नियमों के अनुपालन से प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

