मुजफ्फरनगर में ₹2 करोड़ का साइबर महाठगी कांड! मालिक बनकर अकाउंटेंट से कराए रुपये ट्रांसफर, लखनऊ का आरोपी गिरफ्तार; ₹1.24 करोड़ वापस

मुजफ्फरनगर में ₹2 करोड़ का साइबर महाठगी कांड! मालिक बनकर अकाउंटेंट से कराए रुपये ट्रांसफर, लखनऊ का आरोपी गिरफ्तार; ₹1.24 करोड़ वापस

मुजफ्फरनगर। तकनीक का दुरुपयोग कर कंपनी के अकाउंटेंट को उसके मालिक की पहचान का झांसा देकर दो करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने बीओएसएस स्कैम से जुड़े इस मामले में लखनऊ निवासी अनस उर्फ अयान गाजी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने कंपनी के मुख्य कंप्यूटर में मालवेयर इंस्टॉल कर व्हाट्सऐप अकाउंट पर नियंत्रण हासिल किया और मालिक बनकर अकाउंटेंट से अलग-अलग बैंक खातों में दो करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। पुलिस की कार्रवाई के बाद ठगी गई रकम में से करीब एक करोड़ 24 लाख रुपये कंपनी के मालिक के बैंक खाते में वापस कराए जा चुके हैं। शेष रकम की तलाश के साथ ही पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जिप फाइल खोलते ही कंप्यूटर में इंस्टॉल हुआ मालवेयर

पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ के अनुसार, FUTURE MOBILE LLP कंपनी के अकाउंटेंट को कंपनी के ही एक अन्य कर्मचारी के नाम से जिप फाइल भेजी गई थी। अकाउंटेंट ने भरोसा करते हुए इस फाइल को कंपनी के मुख्य कंप्यूटर पर डाउनलोड कर खोल लिया। आरोप है कि फाइल खुलते ही कंप्यूटर सिस्टम में मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिसकी मदद से साइबर अपराधियों ने कंप्यूटर पर सक्रिय व्हाट्सऐप अकाउंट तक पहुंच बना ली।

जालसाजों ने व्हाट्सऐप अकाउंट की सेटिंग में बदलाव कर कंपनी के वास्तविक मालिक के मोबाइल नंबर की जगह अपना नंबर दर्ज कर दिया। इसके बाद उन्होंने मालिक की पहचान का इस्तेमाल करते हुए अकाउंटेंट से बातचीत शुरू की। लगातार संदेश भेजकर अकाउंटेंट का भरोसा कायम रखा गया, जिससे उसे ठगी का संदेह नहीं हुआ। इसी विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उससे अलग-अलग बैंक खातों में करीब दो करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।

कंपनी के मालिक को जब धोखाधड़ी की जानकारी हुई तो उन्होंने मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की जांच शुरू की। जांच के दौरान संदिग्ध खातों और आरोपी की भूमिका सामने आने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अनस उर्फ अयान गाजी को गिरफ्तार कर लिया।

बीओएसएस स्कैम के जरिए दिया वारदात को अंजाम

पुलिस के मुताबिक, इस तरह की धोखाधड़ी को बीओएसएस स्कैम कहा जाता है। इसमें साइबर अपराधी किसी कंपनी के मालिक या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान अपनाकर कर्मचारियों को भुगतान या रकम ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं। इसके लिए ईमेल, मैसेजिंग ऐप या कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच का सहारा लिया जा सकता है।

इस मामले में भी आरोपियों ने कंप्यूटर में मालवेयर पहुंचाकर व्हाट्सऐप अकाउंट को ठगी का माध्यम बनाया। अकाउंटेंट को लगा कि वह कंपनी के असली मालिक के निर्देशों का पालन कर रहा है, जबकि पर्दे के पीछे साइबर अपराधी उससे रकम ट्रांसफर करा रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई में अब तक करीब एक करोड़ 24 लाख रुपये वापस कराए जा चुके हैं। दो करोड़ रुपये की कुल ठगी के मुकाबले यह रकम कंपनी के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, शेष धनराशि की बरामदगी के लिए जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी की जानकारी मिलते ही शिकायत दर्ज कराने और संबंधित बैंक खातों की तत्काल जांच कराने से रकम को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।

तीन बैंक खातों का इस्तेमाल, चार शिकायतें दर्ज

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अनस उर्फ अयान गाजी के तीन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी में किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन खातों के संबंध में कुल छह लाख 48 हजार रुपये से जुड़ी चार शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। इनमें दो शिकायतें कर्नाटक, एक दिल्ली और एक मुजफ्फरनगर से संबंधित बताई गई हैं।

अलग-अलग राज्यों से शिकायतें मिलने के बाद पुलिस इन बैंक खातों, संबंधित लेनदेन और संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले के तार अन्य साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने के लिए भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनस उर्फ अयान गाजी पुत्र मोहम्मद वाहिद अली के रूप में हुई है। वह मूल रूप से जुत्ती गुलालपुर, थाना इटौंजा, जनपद लखनऊ का निवासी बताया गया है। वर्तमान में उसका पता आदिलनगर, कल्याणपुर, विकासनगर क्षेत्र, थाना गुडंबा, लखनऊ पूर्वी कमिश्नरेट बताया गया है।

एसएसपी के पर्यवेक्षण में हुई कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, कंपनी के मालिक की लिखित शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की गई। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय के पर्यवेक्षण में पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अपराध सुभाषचंद और साइबर क्राइम थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, हेड कांस्टेबल बालकिशन और कांस्टेबल मोहित कुमार शामिल रहे।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले से संबंधित प्रेस नोट में मुकदमा संख्या और धाराओं के विवरण में अंतर होने की जानकारी भी सामने आई है। इसलिए प्रकाशन से पहले मुकदमा संख्या और संबंधित कानूनी धाराओं की पुलिस से पुष्टि किया जाना उचित होगा।

कंपनियों और कर्मचारियों के लिए सबक

यह मामला बताता है कि किसी परिचित या सहकर्मी के नाम से भेजी गई डिजिटल फाइल भी साइबर अपराध का जरिया बन सकती है। कंपनियों को अनजान या संदिग्ध जिप फाइल खोलने से बचना चाहिए और कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय अपनाने चाहिए। बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले संबंधित अधिकारी से दूसरे माध्यम से पुष्टि करना भी बेहद जरूरी है।

साइबर अपराधियों की चालाकी और तकनीकी सेंधमारी के बावजूद पुलिस ने ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा वापस कराने में सफलता हासिल की है। अब जांच का मुख्य फोकस शेष रकम की बरामदगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचना है।

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