मुजफ्फरनगर में मदरसे पर चला बुलडोजर, 6 दिन की कार्रवाई के बाद ध्वस्तीकरण पूरा; ग्राम सभा की जमीन कब्जामुक्त

मुजफ्फरनगर में मदरसे पर चला बुलडोजर, 6 दिन की कार्रवाई के बाद ध्वस्तीकरण पूरा; ग्राम सभा की जमीन कब्जामुक्त

मुजफ्फरनगर। थाना रतनपुरी क्षेत्र के ग्राम फुलत में ग्राम सभा की जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर बनाए गए दारुल उलूम रहिमिया मदरसे के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन की निगरानी में पिछले छह दिनों से लगातार चल रहा अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण अभियान शनिवार को पूरा हो गया। पोकलैंड और बुलडोजर मशीनों की मदद से मदरसे के चिन्हित अवैध निर्माण को पूरी तरह हटा दिया गया। कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन ने जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर सार्वजनिक भूमि के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया भी पूरी की।

बताया गया है कि ग्राम फुलत में ग्राम सभा की बेशकीमती जमीन पर दारुल उलूम रहिमिया नाम से मदरसा संचालित किया जा रहा था। इस जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जे को लेकर मामला प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचा था। पुलिस को दी गई तहरीर में मदरसे की आड़ में धर्मांतरण जैसी गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप भी लगाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।

थाना रतनपुरी में दर्ज मुकदमे में मौलाना हिफजुर्रहमान उर्फ हफीजुर्रहमान अंसारी और उसके दो बेटों जुबैर अंसारी तथा जुनैद अंसारी को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 98/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 352 और 351(2) तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संप्रवर्तन अधिनियम 2021 की धाराओं 3 और 5(2) के तहत कार्रवाई की। पुलिस ने इस मामले में जुनैद अंसारी को 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। वह वर्तमान में जिला कारागार में निरुद्ध बताया गया है।

मदरसे के निर्माण और ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे का मामला अपर जिलाधिकारी न्यायिक के न्यायालय में भी विचाराधीन था। मामले में दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने 17 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। न्यायालय ने बचाव पक्ष का वाद खारिज करते हुए तहसीलदार न्यायिक खतौली के पूर्व आदेश को सही माना। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 की उपधारा 5 के तहत संबंधित भूमि को सार्वजनिक संपत्ति घोषित किए जाने के आदेश को बरकरार रखा गया।

न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी शुरू की। संबंधित पक्ष को विधिवत नोटिस तामील कराने के बाद अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन की मौजूदगी में 22 अगस्त 2026 से ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। लगातार छह दिनों तक पोकलैंड और बुलडोजर की मदद से मदरसे के अलग अलग हिस्सों को चिन्हित कर हटाया गया।

शनिवार को अभियान के अंतिम दिन भी प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। पोकलैंड मशीनों के जरिए बचे हुए निर्माण को गिराया गया। दोपहर तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर ली गई। इसके बाद संबंधित भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त मानते हुए सार्वजनिक भूमि के रूप में प्रशासन के नियंत्रण में ले लिया गया।

प्रशासन की इस कार्रवाई को ग्राम सभा की जमीन से अवैध कब्जा हटाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। छह दिनों तक चले अभियान के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश और राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है।

मदरसे के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती का संदेश भी गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और ग्राम सभा की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों के विरुद्ध किए गए निर्माण और सार्वजनिक भूमि पर कब्जे के मामलों में राजस्व और प्रशासनिक स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

ग्राम फुलत में छह दिनों तक चले इस ध्वस्तीकरण अभियान के समाप्त होने के साथ ही दारुल उलूम रहिमिया मदरसे का अवैध निर्माण पूरी तरह से हटा दिया गया है। अब संबंधित जमीन प्रशासन के कब्जे में है और उसे सार्वजनिक संपत्ति के रूप में सुरक्षित किया गया है।

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