तितावी (मुजफ्फरनगर)। उत्तर प्रदेश में बंधुआ मजदूरी के एक बेहद सनसनीखेज और अमानवीय मामले का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। मुजफ्फरनगर जनपद के थाना तितावी क्षेत्र स्थित गांव मांडी में संचालित एक दोना फैक्ट्री पर पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 मजदूरों को मुक्त कराया है। पुलिस के अनुसार ये श्रमिक पिछले डेढ़ से दो वर्षों से कथित रूप से बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराने का शिकार थे।

बुधवार को जब मुक्त कराए गए श्रमिकों की मुलाकात उनके परिजनों से तितावी थाने में हुई तो भावुक दृश्य देखने को मिला। लंबे समय से लापता बेटों को जीवित देखकर परिजनों की आंखों से आंसू बह निकले। कई श्रमिक अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों से मिलकर फूट-फूटकर रो पड़े।

मोबाइल छीनकर दुनिया से काट दिया गया
पुलिस जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री संचालक और उसके सहयोगी विभिन्न राज्यों के रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को अच्छी नौकरी, मोटे वेतन तथा रहने-खाने की सुविधाओं का लालच देकर मुजफ्फरनगर लाते थे। फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते थे ताकि वे अपने परिवार या बाहरी दुनिया से संपर्क न कर सकें।
मुक्त कराए गए मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे दिन-रात लगातार काम कराया जाता था और इसके बदले उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाता था। उनका कहना है कि उन्हें पर्याप्त भोजन भी नहीं मिलता था और विरोध करने पर मारपीट की जाती थी।
विरोध करने पर नुकीले डंडों से पीटने का आरोप
श्रमिकों ने पुलिस को बताया कि यदि कोई मजदूर वेतन मांगता या घर जाने की बात करता था तो उसे नुकीले डंडों से पीटा जाता था। फैक्ट्री परिसर में कथित तौर पर एक पिटबुल कुत्ता भी रखा गया था, जिसका इस्तेमाल मजदूरों में भय का माहौल बनाए रखने के लिए किया जाता था।
पूछताछ के दौरान मजदूरों ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि नवंबर 2025 में उनके साथी टोपी उर्फ अर्जुन ने जब कथित अत्याचारों का विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गई। आरोप है कि शव को बोरे में भरकर ठिकाने लगा दिया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने हत्या का अलग मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों के सुपुर्द किए गए श्रमिक
विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने चार श्रमिकों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के रहने वाले श्रमिक शामिल हैं। शेष श्रमिकों के परिवारों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस ने बताया कि कुछ श्रमिकों के बयान न्यायालय में दर्ज करा दिए गए हैं और मामले की गहन जांच जारी है।
तीन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, मुख्य आरोपी फरार
पुलिस जांच के अनुसार फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान पर पूरे नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है। उसके साथ प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी पर भी मजदूरों को बंधक बनाकर रखने और प्रताड़ित करने के आरोप लगे हैं।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं मुख्य आरोपी अंकित बालियान फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पुनर्वास और बकाया वेतन दिलाने की प्रक्रिया शुरू
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने कहा कि मुक्त कराए गए श्रमिकों के पुनर्वास, सुरक्षा और काउंसलिंग के लिए प्रशासन संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। सभी श्रमिकों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है तथा श्रम विभाग के सहयोग से उनके बकाया वेतन और अन्य सरकारी सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि जिन श्रमिकों के बैंक खाते नहीं हैं, उनके खाते खुलवाए जा रहे हैं ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उन्हें मिल सके। एसएसपी ने भरोसा दिलाया कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

