मुजफ्फरनगर। शहर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही का मामला सामने आने के बाद शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों ने पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत की और संबंधित महिला चिकित्सक व अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पीड़ित परिवार ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर तहरीर दी और मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई।

रूकनपुर निवासी कोमिन्ता ने शिकायत में बताया कि उनकी पुत्री अंकेश को तीन जुलाई की रात प्रसव पीड़ा होने पर कच्ची सड़क स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि महिला चिकित्सक ने ऑपरेशन करने की बात कहते हुए समय निर्धारित किया और परिजनों से ऑपरेशन सहित अन्य खर्च का भुगतान भी करा लिया, लेकिन तय समय पर ऑपरेशन नहीं किया गया। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

परिजनों के मुताबिक जब प्रसूता की स्थिति अधिक गंभीर हो गई तो उसे तत्काल दूसरे निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि लगातार दबाव पड़ने के कारण गर्भ में ही नवजात की मौत हो चुकी थी। इतना ही नहीं, प्रसूता का गर्भाशय और पेशाब की थैली भी फट चुकी थी, जिसके चलते उसकी जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन करना पड़ा।
घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका आरोप है कि जब उन्होंने संबंधित महिला चिकित्सक से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। इससे परिवार में आक्रोश और बढ़ गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि समय पर ऑपरेशन किया गया होता तो नवजात की जान बचाई जा सकती थी।
पीड़ित परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अस्पताल और महिला चिकित्सक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही सिविल लाइन थाने में तहरीर देकर चिकित्सीय लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की गई है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस ने भी शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। दूसरी ओर, इस पूरे प्रकरण में संबंधित निजी अस्पताल और महिला चिकित्सक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यदि जांच में चिकित्सीय लापरवाही के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अस्पताल और चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

