मुजफ्फरनगर में पहली बारिश में डूबा छपार, अतिक्रमण बने आफत का कारण; सड़कें बनीं तालाब, लोगों का फूटा गुस्सा

मुजफ्फरनगर में पहली बारिश में डूबा छपार, अतिक्रमण बने आफत का कारण; सड़कें बनीं तालाब, लोगों का फूटा गुस्सा

मुजफ्फरनगर। छपार कस्बे में बरसात शुरू होते ही जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत सामने आ गई। मुख्य नालों पर कथित अतिक्रमण और जगह-जगह जमा कूड़े के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। कुछ ही देर की बारिश में मुख्य मार्ग और गलियां जलमग्न हो गईं, जिससे पूरे कस्बे में आवागमन प्रभावित हो गया। जलभराव के कारण राहगीरों, स्कूली बच्चों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों का आरोप है कि जय भारत इंटर कॉलेज के सामने से गुजरने वाले मुख्य नाले पर वर्षों से अतिक्रमण किया गया है। यही नाला पूरे छपार कस्बे और आसपास के इलाकों के बरसाती पानी की निकासी का प्रमुख माध्यम है, लेकिन अतिक्रमण के कारण इसकी चौड़ाई काफी कम हो गई है। इसके साथ ही लंबे समय से नाले की समुचित सफाई भी नहीं कराई गई, जिससे पानी का बहाव पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। नतीजतन, हल्की बारिश भी पूरे कस्बे के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है।

बारिश के दौरान कई सड़कों पर पानी भर जाने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। दुकानों के सामने पानी जमा होने से व्यापार भी प्रभावित हुआ, जबकि स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को जलभराव के बीच होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ा। गंदे पानी के कारण संक्रमण फैलने की आशंका भी लोगों को सता रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और जिलाधिकारी को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद न तो नाले से अतिक्रमण हटाया गया और न ही नियमित सफाई कराई गई। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हर वर्ष बरसात में यही स्थिति बनती है और आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही मुख्य नाले से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आगामी बारिश में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि नालों की तत्काल सफाई कराई जाए, अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि हर बरसात में छपार के लोगों को जलभराव और गंदगी की समस्या का सामना न करना पड़े।

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