मुजफ्फरनगर। नाबालिग के साथ दुष्कर्म और उसे गलत कार्य के लिए मजबूर करने के मामले में मुजफ्फरनगर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सौतेले पिता और सौतेली मां को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी सतीश पर 51 हजार रुपये और दोषी बबली पर 52 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला भोपा थाना क्षेत्र के मोरना गांव से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2021 में दर्ज इस मुकदमे में विवेचना पूरी करने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और पैरवी के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से शनिवार को जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई मिशन शक्ति 6.0 और ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत महिला एवं बाल अपराधों में प्रभावी पैरवी की कड़ी में हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना और न्यायालय में अभियोजन की पैरवी पर विशेष ध्यान दिया गया। अदालत के फैसले के बाद पुलिस ने इसे महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में साक्ष्य संकलन और प्रभावी अभियोजन की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम बताया है।

छह अक्टूबर 2021 को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, छह अक्टूबर 2021 को पीड़िता की ओर से भोपा थाने में लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सौतेले पिता सतीश ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और सौतेली मां बबली ने रुपये लेकर उसे गलत कार्य के लिए मजबूर किया। शिकायत में विरोध करने पर मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया था।
शिकायत के आधार पर भोपा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 328/2021 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 323 और 120बी, पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एन)/6 तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 3/4 के तहत कार्रवाई की गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाए। पुलिस के अनुसार, सतीश और बबली को 30 अक्टूबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया। विवेचना पूरी होने पर 22 नवंबर 2021 को दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी
पुलिस के अनुसार, महिला एवं बाल अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत इस मुकदमे की पैरवी को प्राथमिकता दी गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में मामले की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
क्षेत्राधिकारी भोपा राधारमण सिंह और भोपा थाना प्रभारी आशुतोष कुमार के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस ने अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय बनाए रखा। पुलिस की ओर से बताया गया कि अदालत में एडीजीसी विक्रान्त राठी और दीपक गौतम ने अभियोजन की पैरवी की। वहीं कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल संजीव पूनिया ने न्यायालयीन कार्यवाही में सहयोग किया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश मंजुला भालोटिया, एडीजे/पॉक्सो कोर्ट-01, मुजफ्फरनगर की अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की कार्यवाही पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
सतीश और बबली को 20-20 साल का कठोर कारावास
न्यायालय ने सतीश को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 51 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं बबली को भी दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 52 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
इस फैसले के साथ वर्ष 2021 में दर्ज मामले की न्यायिक कार्यवाही में महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। पुलिस ने कहा कि महिला और बाल अपराधों से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विवेचना, साक्ष्य संकलन और अभियोजन की पैरवी पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
मिशन शक्ति 6.0 के तहत महिला और बाल सुरक्षा पर जोर
मुजफ्फरनगर पुलिस ने इस फैसले को मिशन शक्ति 6.0 और ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत की जा रही कार्रवाई से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान तथा संरक्षण पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, ऐसे मामलों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना, साक्ष्यों का संकलन और अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य न्यायालय में अपराध साबित होने पर दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना है।
इस मामले में अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के बाद पुलिस ने महिला एवं बाल अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। वहीं, पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण है।

