मुजफ्फरनगर। जनपद में तीन वर्षीय मासूम की अभिरक्षा (कस्टडी) से जुड़े पारिवारिक विवाद में फैमिली कोर्ट की ओर से अपनाई गई विशेष कानूनी प्रक्रिया चर्चा का विषय बन गई। न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार शाम प्रतिवादी महिला के आवास पर पहुंचकर ढोल बजवाकर मुनादी कराई गई और न्यायालय का नोटिस घर के दरवाजे पर चस्पा किया गया। इस कार्रवाई को देखने के लिए आसपास के लोग भी एकत्र हो गए।

जानकारी के अनुसार, नगर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमपुरी निवासी अंश मित्तल ने फैमिली कोर्ट में अपनी पत्नी स्नेह गर्ग के विरुद्ध याचिका दायर कर अपने तीन वर्षीय पुत्र सारांश मित्तल की अभिरक्षा मांगी है। याचिका में उन्होंने स्वयं को बच्चे का विधिक संरक्षक घोषित किए जाने और बच्चे की कस्टडी अपने सुपुर्द किए जाने का अनुरोध किया है।

बताया गया है कि वर्तमान में तीन वर्षीय सारांश अपनी मां के साथ ब्रह्मपुरी स्थित अपने ननिहाल में रह रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से अदालत ने विधिक प्रक्रिया के तहत विशेष तरीके से नोटिस तामील कराने के निर्देश दिए।
इसी क्रम में न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए संबंधित अधिकारी प्रतिवादी के निवास पर पहुंचे, जहां ढोल बजाकर मुनादी कराई गई और न्यायालय का नोटिस मकान के मुख्य द्वार पर चस्पा कर दिया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट भी न्यायालय को भेजी गई।
इस असामान्य कार्रवाई की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में इसकी चर्चा शुरू हो गई। स्थानीय लोगों के बीच यह मामला पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। कानूनी जानकारों का कहना है कि जब सामान्य तरीके से नोटिस की तामील संभव नहीं हो पाती या प्रतिवादी की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पाती, तब न्यायालय विधि के अनुसार इस प्रकार की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दे सकता है।
फैमिली कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है। अब आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर बच्चे की अभिरक्षा से जुड़े मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

