मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में गंभीर आपराधिक मामलों में अपने फैसलों को लेकर चर्चा में रहे न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का तबादला कर दिया गया है। अब वह फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन के बजाय परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायिक कार्य करेंगे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से जारी प्रशासनिक आदेश के तहत जिले में कई न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस फेरबदल में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और अन्य अदालतों में तैनात न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र भी बदले गए हैं।

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर मुजफ्फरनगर में अपने कार्यकाल के दौरान कई गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई और मृत्युदंड के फैसलों को लेकर चर्चा में रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने छह अप्रैल से सात सितंबर के बीच 10 आपराधिक मामलों में कुल 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इनमें अधिवक्ता समीर सैफी, शेखर, राजेंद्र सैनी, होमगार्ड रतिराम और किसान राज सिंह हत्याकांड जैसे चर्चित मामले शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, उनके तबादले को इन फैसलों से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है। प्रशासनिक आदेश में स्थानांतरण के विशिष्ट कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस बदलाव को न्यायिक प्रशासन के तहत किया गया स्थानांतरण ही माना जाना चाहिए।
साढ़े आठ महीने के कार्यकाल में रहे चर्चा में
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर पिछले वर्ष 29 नवंबर को बरेली से स्थानांतरित होकर मुजफ्फरनगर आए थे। यहां उन्हें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मुजफ्फरनगर और शामली से जुड़े कई गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई की।
उनके न्यायिक कार्यकाल की सबसे अधिक चर्चा छह अप्रैल से सात सितंबर के बीच सुनाए गए मृत्युदंड के फैसलों को लेकर हुई। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस अवधि में 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। हत्या सहित गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि के बाद दिए गए इन फैसलों ने उन्हें चर्चा में ला दिया।
हालांकि, मृत्युदंड की सजा सुनाया जाना और सजा का अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। सत्र न्यायालय द्वारा सुनाए गए मृत्युदंड की पुष्टि उच्च न्यायालय से होना आवश्यक है। इसके अलावा दोषियों को कानून के तहत अपील और अन्य उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार भी रहता है।
हत्या के 97 मामलों की पत्रावलियां वापस लेने का मामला भी रहा चर्चा में
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का कार्यकाल अदालत से हत्या के मामलों की बड़ी संख्या में पत्रावलियां वापस लिए जाने को लेकर भी चर्चा में रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने उनकी अदालत से हत्या से संबंधित 97 पत्रावलियां वापस ले ली थीं।
न्यायिक प्रशासन में पत्रावलियां वापस लेने की प्रक्रिया के तहत संबंधित मामलों को नियमानुसार दूसरी अदालतों में आवंटित किया जा सकता है। इस कार्रवाई के बाद न्यायाधीश दिवाकर ने एक न्यायिक आदेश में प्रशासनिक शक्ति के इस्तेमाल के आधार को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस बात पर टिप्पणी की थी कि मामलों की पत्रावलियां वापस लेने के अधिकार के साथ-साथ उस अधिकार के प्रयोग के आधार पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम ने न्यायिक प्रशासनिक निर्णयों के औचित्य और पारदर्शिता को लेकर चर्चा पैदा की थी। हालांकि, पत्रावलियां वापस लिए जाने की घटना और वर्तमान तबादले के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जता चुके थे चिंता
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी एक न्यायिक आदेश में चिंता व्यक्त कर चुके हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने स्थानीय पुलिस की ओर से सुरक्षा में कटौती किए जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपनी पूर्व तैनाती बरेली और वाराणसी में मिली सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मुजफ्फरनगर में उपलब्ध सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
हालांकि, सुरक्षा संबंधी खतरे के आकलन और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के पीछे के कारणों का स्वतंत्र आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले को न्यायाधीश की ओर से व्यक्त की गई चिंता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शिव कुमारी को मिली फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन की जिम्मेदारी
न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण के तहत शिव कुमारी को फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है। वह इससे पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या दो में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं।
रवि कुमार दिवाकर के स्थानांतरण के बाद अब फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन में न्यायिक कार्य की जिम्मेदारी शिव कुमारी संभालेंगी। इस बदलाव के साथ अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई नई तैनाती के अनुरूप आगे बढ़ेगी।
परिवार न्यायालय में भी हुआ बदलाव
न्यायिक फेरबदल के तहत मुजफ्फरनगर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश खलीकुज्जमां का भी स्थानांतरण किया गया है। उन्हें औरैया जिले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण यानी एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनके स्थान पर औरैया में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्यरत रजनीश कुमार को मुजफ्फरनगर परिवार न्यायालय का प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
इस बदलाव के बाद परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के साथ अपर प्रधान न्यायाधीश के स्तर पर भी नई तैनाती हुई है। रवि कुमार दिवाकर अब अपर प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे, जबकि रजनीश कुमार प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभालेंगे।
परिवार न्यायालय में मुख्य रूप से वैवाहिक विवादों, विवाह संबंधी कानूनी मामलों और अन्य पारिवारिक विवादों की सुनवाई की जाती है। इस तरह रवि कुमार दिवाकर का न्यायिक कार्यक्षेत्र अब गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली फास्ट ट्रैक अदालत से बदलकर परिवार न्यायालय हो जाएगा।
मंजुला भालोटिया की जिम्मेदारी में भी बदलाव
न्यायिक अधिकारियों के फेरबदल में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या एक की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया की जिम्मेदारी भी बदली गई है। उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पॉक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में होती है। न्यायिक अधिकारियों की नई तैनाती के बाद जिले की विभिन्न अदालतों में पीठासीन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव हुआ है।
प्रशासनिक आदेश के तहत हुआ फेरबदल
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण की ओर से जारी प्रशासनिक आदेश के तहत न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में यह बदलाव किया गया है। इसके अंतर्गत फास्ट ट्रैक कोर्ट, परिवार न्यायालय और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से जुड़ी जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास हुआ है।
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का स्थानांतरण उनके हालिया फैसलों को लेकर चर्चा के बीच हुआ है, लेकिन केवल समय के संयोग के आधार पर दोनों घटनाओं को जोड़ना उचित नहीं होगा। तबादले के कारणों के संबंध में कोई विशिष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल न्यायिक प्रशासन के इस फेरबदल के बाद मुजफ्फरनगर की विभिन्न अदालतों में नई जिम्मेदारियों के अनुसार कामकाज आगे बढ़ेगा।

