मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में संचालित एक दोना फैक्ट्री से मानवता को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां गरीब मजदूरों को नौकरी और अच्छे वेतन का लालच देकर लाया गया और फिर उन्हें बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दी जाती रहीं। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त छापेमारी में 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया है। मजदूरों ने जो दर्दनाक कहानी सुनाई, उसे सुनकर मौके पर मौजूद अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडिक के नेतृत्व में पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान सामने आए तथ्यों ने सभी को स्तब्ध कर दिया। पुलिस के अनुसार विभिन्न राज्यों और नेपाल से गरीब मजदूरों को 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर यहां बुलाया गया था, लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद उन्हें बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं दी जाती थी।

जांच में पता चला कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष से मजदूरों को फैक्ट्री परिसर में ही कैद रखकर काम कराया जा रहा था। मजदूरों से सुबह चार बजे से लेकर देर रात तक लगातार काम लिया जाता था और आराम के लिए मुश्किल से दो से तीन घंटे का समय मिलता था। खाने के नाम पर बेहद निम्न स्तर का भोजन दिया जाता था, जबकि बीमार होने पर भी काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
मुक्त कराए गए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि विरोध करने वालों के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया जाता था। उन्हें बेल्ट और डंडों से पीटा जाता था। मजदूरों के अनुसार भय का माहौल बनाए रखने के लिए कई बार सार्वजनिक रूप से मारपीट की जाती थी ताकि अन्य लोग विरोध करने की हिम्मत न जुटा सकें। पुलिस ने मौके से बेल्ट, डंडे और अन्य संदिग्ध सामान भी बरामद किया है, जिनका उपयोग कथित तौर पर प्रताड़ना के लिए किया जाता था।
मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि कोई भागने की कोशिश करता था तो उसके पीछे प्रशिक्षित कुत्ता छोड़ दिया जाता था। लगातार भय, मारपीट और बंदी जैसी परिस्थितियों में रहने के कारण मजदूर मानसिक और शारीरिक रूप से बुरी तरह टूट चुके थे।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब जांच में तीन मजदूरों के लापता होने की जानकारी सामने आई। इनमें नेपाल निवासी एक मजदूर की मौत का मामला भी जांच के दायरे में आ गया है। पुलिस अब इस पहलू की भी गहनता से पड़ताल कर रही है कि कहीं प्रताड़ना और बंधुआ मजदूरी के चलते अन्य गंभीर अपराध तो नहीं हुए।
संयुक्त टीम ने कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री मालिक के पिता प्रदीप बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों से पूछताछ जारी है। वहीं मुख्य आरोपी अंकित बालियान और उसका एक सहयोगी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
श्रम विभाग ने फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए उसे सील करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। पुलिस ने मामले में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। मजदूरों को अमानवीय परिस्थितियों में रखे जाने के आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस सफल कार्रवाई पर पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा भी की गई है।
मांडी गांव की इस फैक्ट्री से सामने आई भयावह तस्वीर ने न केवल प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक मजदूरों के साथ कथित अत्याचार का यह सिलसिला कैसे चलता रहा। अब पूरे मामले पर क्षेत्र ही नहीं बल्कि जनपद भर की निगाहें टिकी हुई हैं।

