मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट में मंडराया बड़ा खतरा! 50 साल पुरानी जर्जर इमारत से गिर रहा मलबा, प्रशासन ने रास्ता कराया बंद

मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट में मंडराया बड़ा खतरा! 50 साल पुरानी जर्जर इमारत से गिर रहा मलबा, प्रशासन ने रास्ता कराया बंद

मुजफ्फरनगर। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित सहायक मनोरंजन कर आयुक्त कार्यालय की करीब पांच दशक से अधिक पुरानी जर्जर इमारत इन दिनों खतरे का सबब बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश के बीच भवन की छत और दीवारों से प्लास्टर और मलबा गिरने लगा है। किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए इमारत के आसपास से लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है।

बारिश ने बढ़ाई जर्जर भवन की मुश्किल

बताया जा रहा है कि सहायक मनोरंजन कर आयुक्त कार्यालय की पुरानी इमारत लंबे समय से जर्जर हालत में थी। भवन की दीवारें और छत पहले ही कमजोर हो चुकी थीं। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण इमारत के अलग अलग हिस्सों में नमी पहुंचने लगी। इसके चलते छत और दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगा और मलबा नीचे गिरने लगा।

कलेक्ट्रेट परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम फरियादी पहुंचते हैं। ऐसे में भवन से अचानक मलबा गिरने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी।

कभी भी हो सकता था बड़ा हादसा

जर्जर भवन के आसपास लोगों की लगातार आवाजाही को देखते हुए किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी। प्रशासन को डर था कि यदि कोई व्यक्ति भवन के नीचे या उसके बिल्कुल पास से गुजरता है और उसी समय भारी मलबा गिर जाता है तो वह गंभीर रूप से घायल हो सकता है।

इसी संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया।

टीन शेड और बैरिकेडिंग से रास्ता बंद

प्रशासन की ओर से जर्जर इमारत के बाहरी हिस्से के चारों ओर टीन शेड और बैरिकेडिंग कर दी गई है। इमारत की ओर जाने वाले रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। साथ ही भवन के अंदर किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

प्रशासन की कोशिश है कि बारिश के दौरान यदि अचानक छत या दीवार का कोई हिस्सा गिरता है तो उसकी चपेट में कोई व्यक्ति न आए। लोगों को जर्जर भवन से सुरक्षित दूरी पर रखने के लिए प्रवेश मार्ग भी अवरुद्ध किया गया है।

कई महीने पहले ही खाली हो चुका कार्यालय

इस मामले में राहत की बात यह है कि जर्जर इमारत में संचालित होने वाला सहायक मनोरंजन कर आयुक्त कार्यालय कई महीने पहले ही दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि पुराने कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर लंबे समय से ताला लगा हुआ है और वर्तमान में भवन के अंदर किसी तरह की नियमित सरकारी गतिविधि नहीं हो रही है।

इसके बावजूद कलेक्ट्रेट परिसर का हिस्सा होने के कारण भवन के आसपास लोगों की आवाजाही बनी रहती थी। कार्यालय खाली होने के बाद भी लोग इसके आसपास से गुजरते थे और कई बार यहां रुकते भी थे।

धरना प्रदर्शन करने वाले लोग भी बैठते थे

कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने वाले लोग भी कई बार इस इमारत के आसपास बैठते रहे हैं। गर्मी में धूप से बचने और बारिश के दौरान पानी से बचने के लिए आम लोग भी भवन के नीचे या आसपास कुछ देर बैठ जाते थे।

ऐसे में भवन से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आने के बाद यहां बैठने और गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया था। प्रशासन की ओर से रास्ता बंद किए जाने के बाद अब लोगों को इस हिस्से से दूर रखा जा रहा है।

अब तकनीकी जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल प्रशासन ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था कर दी है, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि 50 वर्ष से अधिक पुरानी इस जर्जर इमारत का भविष्य क्या होगा। भवन की तकनीकी स्थिति का विस्तृत आकलन कराया जाना जरूरी माना जा रहा है।

यदि तकनीकी जांच में भवन की संरचना पूरी तरह कमजोर पाई जाती है तो इसे ध्वस्त करने का निर्णय लिया जा सकता है। वहीं यदि भवन की मरम्मत संभव हुई तो आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा कार्य कराया जा सकता है।

कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर में अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में जर्जर भवन को लेकर स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि बारिश के मौसम में किसी तरह की जनहानि की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

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