लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पार्टी संगठन को चुनावी मोड में लाने के साथ ही जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद में जुटी है। संगठन में नई जिम्मेदारियों के साथ नए चेहरों को आगे लाने और गांव से लेकर बूथ स्तर तक जनसंपर्क बढ़ाने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात हुई। इस दौरान उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरण, संगठनात्मक तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात को सुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरणादायक बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को आगामी चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी
भाजपा ने मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए संगठन में भी बदलाव शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने छह संगठनात्मक क्षेत्रों और विभिन्न मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की घोषणा की है। नई टीम में करीब 60 प्रतिशत नए चेहरों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल को अवध, अभिजात मिश्रा को गोरखपुर, प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह को काशी और गीता शाक्य को बृज क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। राम प्रताप चौहान को पश्चिम और शंकर लोधी को कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।
इसके अलावा पार्टी ने प्रदेश महामंत्रियों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ कर दी है। विभिन्न मोर्चों की जिम्मेदारियां भी नए पदाधिकारियों को सौंपी गई हैं। राजेश चौधरी को युवा मोर्चा, संजय राय को ओबीसी मोर्चा, धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा, प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा और शंकर गिरि को किसान मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है।
हर वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति
भाजपा के संगठनात्मक बदलाव को महज फेरबदल के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पार्टी की रणनीति हर सामाजिक वर्ग और क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की है। विभिन्न मोर्चों और क्षेत्रीय समितियों के माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों को गांव, वार्ड और बूथ स्तर तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
नौ अगस्त से शुरू हुई तिरंगा यात्रा को भी पार्टी के व्यापक जनसंपर्क अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
मौजूदा विधायकों का तैयार हो रहा रिपोर्ट कार्ड
मिशन 2027 के तहत भाजपा अब विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी शुरुआती मंथन में जुट गई है। पार्टी के मौजूदा विधायकों के कामकाज और क्षेत्र में उनकी सक्रियता का आकलन किए जाने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक विधायकों की जनता के बीच स्वीकार्यता, स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ और संभावित नाराजगी को लेकर सर्वे कराया जा सकता है।
इस बार केवल मौजूदा विधायक होना टिकट की गारंटी नहीं माना जाएगा। जिन विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में नाराजगी होगी या जिनका प्रदर्शन कमजोर माना जाएगा, उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका देने का विकल्प भाजपा खुला रख सकती है।
युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है मौका
भाजपा की संभावित रणनीति में युवा चेहरों को अधिक अवसर देने पर भी जोर बताया जा रहा है। पार्टी संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद विधानसभा चुनाव में भी युवाओं को बड़ी संख्या में टिकट दिए जाने की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी का जोर रह सकता है।
वहीं, एक-दो लोकसभा सांसदों की ओर से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताए जाने की चर्चा है। कुछ सांसद अपने परिवार के सदस्यों के लिए भी टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
एनडीए में सीट बंटवारा भी होगी बड़ी चुनौती
भाजपा के सामने उम्मीदवारों के चयन के साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीटों के बंटवारे का मुद्दा भी महत्वपूर्ण होगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि 2027 का विधानसभा चुनाव एनडीए के सहयोगी दलों के साथ मिलकर लड़ा जाएगा।
पिछली बार चुनाव के बाद एनडीए में शामिल हुए सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के साथ सीटों को लेकर औपचारिक बातचीत महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा एनडीए के अन्य सहयोगी दल भी अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर सकते हैं।
भाजपा के सामने चुनौती होगी कि सहयोगी दलों को पर्याप्त राजनीतिक स्थान देने के साथ ही अपनी सीटों और संगठनात्मक वर्चस्व के बीच संतुलन कायम रखा जाए।
योगी ही होंगे भाजपा का चेहरा
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण बात नेतृत्व को लेकर स्पष्टता है। पार्टी की ओर से यह संकेत दिया गया है कि विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। ऐसे में 2027 का चुनाव योगी सरकार के कामकाज और उसके मॉडल पर जनता के फैसले के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा का लक्ष्य लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और कानून व्यवस्था को चुनावी मुद्दों के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी में जुटे हैं।
कुल मिलाकर मिशन 2027 को लेकर भाजपा ने संगठन से लेकर संभावित उम्मीदवारों तक अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन, जनता की नाराजगी, नए चेहरों की संभावनाएं और एनडीए सहयोगियों के साथ सीटों का समीकरण आने वाले दिनों में पार्टी के लिए अहम रहने वाला है। अब देखना होगा कि भाजपा की यह संगठनात्मक और चुनावी रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव में उसे लगातार तीसरी जीत दिलाने में कितनी कामयाब होती है।

