नोएडा में भ्रष्टाचार की इमारत ट्विन टावर को गिराने से आसपास के लोगों को धूल मिट्टी से राहत नहीं मिली, वहीं बॉम्बे हाइकोर्ट की चेतावनी के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल खेल के मैदान के लिए आरक्षित ज़मीन से सटी हुई जगह पर सर्वोच्च न्यायालय के स्टे लगाने के बावजूद निर्माण जारी रखने को लेकर बॉम्बे हाइकोर्ट ने निर्माणकर्ता को चेतावनी देते हुए कहा कि आपको भी ट्विन टॉवर जैसा अंजाम का सामना कर पड़ सकता है।

दिलीप वी सप्तर्षि और दो अन्य निवासियों ने एक जनहित याचिका डाली थी, जिसमें दावा किया गया था कि1992 की विकास योजना के मुताबिक खार में एक जमीन को खेल के मैदान बनाने की योजना रखी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के 1995 के आदेश के बाद निर्माण पर रोक लगा दी गई थी, स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) ने इस ज़मीन पर एकीकृत रियल्टी परियोजना के निर्माण की अनुमति दे दी थी।

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि 2019 में एसआरए प्रोजेक्ट निर्माणकर्ताओं ने उक्त ज़मीन पर फिर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। इसी मामले को लेकर मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई में एक खंडपीठ सुनवाई कर रही थी।
पिछले हफ्ते कोर्ट ने आर्किटेक्ट को मुआयना करने के लिए कहा था जहां निर्माणकर्ता ने निर्माण कार्य शुरू किया था और उसके बाद उपलब्ध खाली ज़मीन की सीमा को लेकर एक रिपोर्ट जमा करने को कहा था। एसआरए ने निर्माणकर्ताओं को, जो सटी हुई ज़मीन पर निर्माणकार्य कर रहे थे, निर्माण की अनुमति दे दी थी, भूखंड की सीमा पर निर्माणकार्य से उसकी स्थिति बदल गई और खेल का मैदान 5,255 वर्गमीटर घट गया था।
